What Kind of Judiciary is There in India | भारत में किस तरह की न्यायपालिका है

What Kind of Judiciary is There in India | भारत में किस तरह की न्यायपालिका है
What Kind of Judiciary is There in India | भारत में किस तरह की न्यायपालिका है
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What Kind of Judiciary is There in India | भारत में किस तरह की न्यायपालिका है

 

Kind of Judiciary is There in India :-किसी भी संघीय संविधान का एक महत्वपूर्ण तत्व स्वतंत्र न्यायपालिका होती है। स्वतंत्र न्यायपालिका से तात्पर्य न्यायपालिका की स्थिति से है, जहां पर न तो केंद्र और ना ही राज्य अपना कोई प्रभाव न्यायपालिका पर छोड़े। संघीय संविधान द्वारा शक्ति विभाजन जो केंद्र और राज्यों के मध्य किया जाता है कि व्याख्या का अधिकार भी ऐसी ही न्याय अन्याय को शक्ति द्वारा संभव माना गया है। संविधान के पदों के अर्थ में कोई संदिग्धता उत्पन्न होती है, तो एक निष्पक्ष न्यायपालिका एक अनिवार्य आवश्यकता होती है।

 

भारतीय संविधान निर्माण समिति को इस विषय का ज्ञान था, कि राज्य एवं केंद्र के मध्य शक्तियों का विभाजन कोई विवाद उत्पन्न कर सकता है । अतः उन्होंने संविधान में न्यायपालिका को स्वतंत्र करना हैं, तो अनेकों उपबंध प्रस्तुत किए हैं, जैसे-

 

(Kind of Judiciary is There in India )

 

(1) भारतीय सविधान का अनुच्छेद 124 के द्वारा भारत में एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है। जो भारत के मुख्य न्यायाधिपति तथा जब तक संसद विधि द्वारा और अधिक संख्या निर्धारित नहीं करती, जब तक अन्य सात से अधिकतम न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा।

 

(2) उच्चतम न्यायालय के तथा राज्यों के उच्च न्यायालयों के ऐसे न्यायाधीशों में परामर्श करके जिनसे की प्रयोजन के लिए परामर्श करना राष्ट्रपति आवश्यक समझे, राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा उच्चतम न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश की नियुक्ति करेगा, तथा न्यायाधीश तब तक पद धारण करेगा जब तक वह 65 वर्ष की आयु प्राप्त ना कर ले। Preventive Work of Police – पुलिस का निवारक कार्य




(3) भारतीय सविधान का अनुच्छेद 217 के अंतर्गत राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं राज्य के राज्यपाल की सम्मति से करेगा। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति उस राज्य में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके करेगा। इस प्रकार न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संविधान कार्यकारिणी को पूर्ण विवेक शक्ति प्रदान नहीं करता है।High Court Judgement on IPC 498a and IPC 326 – पत्नी पर एसिड अटैक करने के दोषी की सजा में कमी

 

(४) न्यायाधीशों की नियुक्ति (Appointment of Judges):- सदैव ही ज्येष्टता के आधार पर की जाती रही है। परंतु सन 1973 में पहली बार इस सिद्धांत का उल्लंघन हुआ जब भूतपूर्व न्यायाधीश ए०एन० आर० को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। अनेक न्यायाधीशों ने इस नियुक्ति का विरोध किया तथा अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।

 

इस नियुक्ति को धारा 124 (क) का उल्लंघन बताया गया, क्योंकि किसी भी ऐसी नियुक्ति में उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संबंधी आवश्यक है। परंतु उक्त नियुक्ति में न्यायाधीशों से परामर्श नहीं लिया गया। वास्तविक रूप में यह 25 वर्षों से विकसित हो रही परंपरा का एक प्रकार से उल्लंघन हुआ था। और कार्यपालिका न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हस्तक्षेप किया था। Trial Before Session Court in Hindi – सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण




(I) प्रत्येक न्यायाधीश का कार्यकाल सुरक्षित होता है उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की पदच्युत किसी सिद्ध दुर्व्यवहार अथवा योग्यता के आधार पर ही होगी। राष्ट्रपति द्वारा किसी भी न्यायाधीश को पदच्युत केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा संस्कृति किए जाने पर ही संभव हो सकेगा।।

 

(iii) (Supreme Court) उच्चतम तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को ऐसे वेतन दिए जाएंगे जैसे कि द्वितीय अनुसूची में उल्लिखित है। प्रत्येक न्यायाधीश को ऐसे विशेष अधिकारों और भत्तो का तथा अनुपस्थिति छुट्टी और निवृत्त वेतन के बारे में ऐसे अधिकारों का जैसे कि संसद निर्मित विधि के द्वारा या अधीन समय-समय पर निर्धारित किए जायें, तथा जब तक इस प्रकार निर्धारित ना हो, तब तक ऐसे विशेष भत्तो और अधिकारों का जैसे कि द्वितीय अनुसूची में उल्लिखित है, अधिकार होगा। Child Custody Law in India | भारत में चाइल्ड कस्टडी के लिए क्या कानून है

 

(iv) उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के कर्तव्य पालन से संबंधित आचरण पर विवाद संसद तथा राज्य के विधान मंडलों में से नहीं किया जा सकेगा। (Kind of Judiciary is There in India )

 

(v) उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश जो अपने पद से निवृत्त हो चुका है। किसी भी न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश जो अपने पद से निवृत्त हो चुका है, किसी भी न्यायिक अधिकारी अथवा न्यायालय के समक्ष मुकदमे की पैरवी नहीं कर सकेगा। IPC 292 in Hindi | Indian Penal Code Section 292 | आई.पी.सी.की धारा 292 में क्या अपराध होता है ?




(vi) कोई भी व्यक्ति जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका है। वह भारत क्षेत्र में किसी भी न्यायालय में ना तो कोई कार्य करेगा और ना ही किसी केस की पैरवी कर सकेगा। परंतु यदि कोई व्यक्ति किसी उच्च न्यायालय के पद से सेवानिवृत्त हुआ है। तो वह केवल उच्चतम न्यायालय में कार्य कर सकता है, या पैरवी कर सकता है। IPC Section 290 in Hindi | Dhara 290 Kya Hai | आई.पी.सी.की धारा 290 में क्या अपराध होता है ?

 

(vii) परंतु किसी न्यायाधीश के ना तो विशेषाधिकार में और ना भत्तो में और ना अनुपस्थिति छुट्टियां निवृत्त वेतन विषयक उसके अधिकारों में उसकी नियुक्ति के पश्चात उसका अलाभकारी कोई भी परिवर्तन किया जायेगा।

 

(viii) उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन तथा भत्ते केवल को संसद के समक्ष मतदान के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। IPC 298 in Hindi | Dhara 298 Kya Hai | आई.पी.सी . की धारा 298 में क्या अपराध होता है ?

 

(ix) उच्चतम न्यायालय के कर्मचारियों के वेतन वृद्धि तथा निवृत्ती वेतन का वह भारत की संचित निधि से किया जाएगा।

 

(x) अन्य न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय को अपने कर्मचारियों की नियुक्ति तथा उनकी सेवा से संबंधित नियम निर्माण करने का अधिकार होगा।




इस प्रकार भारतीय संविधान में उच्चतम तथा उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता की कार्यकारिणी के कुप्रभाव से मुक्त कर रखने का पूरा पूरा प्रयास किया गया है। और संविधान में ऐसी व्यवस्था की गई है, कि जिसके अंतर्गत राज्यों को निर्देश दिया गया है, कि न्यायपालिका की कार्यकारिणी से पृथक रखने का पूरा प्रयास करें।




 

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