What is the Difference Between Ordinary Bill, Finance Bill and Money Bill in Hindi

What is the Difference Between Ordinary Bill, Finance Bill and Money Bill in Hindi
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What is the Difference Between Ordinary Bill, Finance Bill and Money Bill in Hindi

 

प्रश्न :- साधारण विधेयक, वित्त विधेयक एवं धन विधेयक में क्या अंतर है? साधारण विधेयक के पारित किए जाने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए |

 

साधारण विधेयक, वित्त विधेयक एवं धन विधेयक में क्या अंतर है – Ordinary Bill Finance Bill and Money Bill

 

1- साधारण विधेयक ऐसे विधेयक को कहते हैं , जो ना तो धन विधेयक हो ना ही वित्त विधेयक।

2- साधारण विधेयक सदन के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है , जबकि वित्त विधेयक एवं धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश किए जा सकते हैं।

3 – साधारण बिल को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति आवश्यक नहीं होती, जो अन्य दोनों प्रकार के बिलों के लिए आवश्यक है।

4- साधारण विधेयक एवं वित्त विधेयक को पारित किए जाने की प्रक्रिया एक समान है, सिवाय इसके कि वित्त विधेयक को केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है | धन विधेयक को पारित किए जाने की प्रक्रिया विशिष्ट एवं अलग है।

5 – साधारण एवं वित्त विधेयकों को राज्यसभा द्वारा संशोधित अथवा स्वीकृत किया जा सकता है , जो धन विधेयक के संबंध में संभव नहीं है।




6- साधारण विधेयक एवं वित्त विधेयकों के पारित होने पर उसे सदनों की संयुक्त बैठक से दूर किया जा सकता है, धन विधेयक में गतिरोध की अवस्था आने की संभावना ही नहीं होती |

8- धन विधेयक वह विधेयक होता है, जो केवल उन विषयों का समावेश करता है | जो अनुच्छेद 110 (1) में गिनाए गए हैं , जबकि वित्त विधेयक अनुच्छेद 110 (1) में गिनाए गए विषयों के साथ-साथ अन्य विषयों में भी संबंधित रहता है , इसी कारण कहा गया है , कि प्रत्येक धन विधेयक वित्त विधेयक होता है, परंतु प्रत्येक विधेयक धन विधेयक नहीं होता है। What Kind of Judiciary is There in India | भारत में किस तरह की न्यायपालिका है

 

संसद में साधारण विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया – Ordinary Bill Finance Bill and Money Bill

 

एक साधारण विधेयक को संसद के दोनों सदनों में से किसी एक सदन में पेश किया जा सकता है। विधेयक को सदन में तीन वचन से गुजरना होता है।




 

  1. प्रथम वचन में विधायक को मंत्री द्वारा सदन की अनुमति से सदन में पेश किया जाता है | इस अवस्था पर सामान्यतया विधेयक पर कोई बहस नहीं होती।
  2. द्वितीय वचन पर विधेयक पर खंड उपखंड पर विचार विमर्श किया जाता है | इस स्थिति में विधेयक में संशोधन भी प्रस्तावित किए जा सकते हैं।
  3. तीसरे पाठन की स्थिति में संक्षिप्त बहस होती है, जिसके पश्चात विधेयक को बिना किसी महत्वपूर्ण परिवर्तन के पास कर दिया जाता है, इसके बाद विधेयक को दूसरे सदन में भेज दिया जाता है | जहां फिर से उसे उन्हें तीन वचनों की स्थितियों से गुजरना होता है , यदि दूसरा सदन इसके बाद विधेयक को पास कर देता है, तो उसे राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता है | राष्ट्रपति की अनुमति पर वह विधेयक कानून बन जाता है।  Nature of Indian Constitution in Hindi- भारतीय संविधान की प्रकृति संघात्मक या एकात्मक

 

संवैधानिक गतिरोध एवं सदनों की संयुक्त बैठक –

 

यदि कोई साधारण विधेयक दोनों सदनों द्वारा एक मत से पारित नहीं हो पाता, तो यह स्थिति दोनों सदनों के बीच असहमति की स्थिति होती है। जिसे संवैधानिक गतिरोध कहते हैं। जिसे सदनों की संयुक्त बैठक द्वारा दूर किया जाता है। Elections of Deputy Chairman and Deputy Speaker of Rajya Sabha and Lok Sabha || राज्यसभा तथा लोकसभा के उपसभापति तथा डिप्टी स्पीकर के चुनाव




 

संयुक्त बैठक – ऐसी बैठक तीन स्थितियों में बुलाई जाती है –

 

(1) जब एक सदन द्वारा भेजे गए विधेयक को दूसरा सदन अस्वीकृत कर दे, या

(2) दूसरा सदन विधेयक में किए गए संशोधन पर असहमत हो या

(3) जबकि 6 माह का समय बीत चुका हो फिर भी दूसरे सदन में उसे पास ना किया गया हो।

 

[ अनु०108(4) ] , संयुक्त बैठक राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाती है। इसकी अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है | यदि इस संयुक्त बैठक में विधेयक को दोनों सदनों के उपस्थित और मत देने वाले कुल सदस्यों के बहुमत द्वारा पास कर दिया जाता है। तो उसे दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाएगा।  Features of Parliamentary System, Presidential Rule and Written Constitution in India

 

राष्ट्रपति की अनुमति –

 

दोनों सदनों द्वारा पास हो जाने के बाद भी साधारण विधेयक कानून का रूप नहीं ले सकता जब तक कि राष्ट्रपति उसे अपने अनुमति ना दे दे। इसी कारण दोनों सदनों द्वारा पास हो जाने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास उनकी अनुमति के लिए भेज दिया जाता है।




 

(अनु०111), राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं।

 

(I) वह विधेयक को स्वीकृति प्रदान कर दे, या

(ii) वह अपनी अनुमति रोक दे, या

(iii) वह अपने सुझावों या बिना सुझाव के विधेयक को सदनों के पास पुनर्विचार के लिए वापस लौटा सकता है, किंतु यदि विधेयक को राष्ट्रपति के सुझावों के अनुसार संशोधित करके या बिना संशोधित के दोबारा राष्ट्रपति के पास अनुमति के लिए भेजा जाता है | तो राष्ट्रपति अपने अनुमति को नहीं रोक सकता। Salient Features of the Constitution of India and The Construction Process

 

धन विधेयक की परिभाषा

 

संविधान के अनुच्छेद 110 एक में धन विधेयक की परिभाषा देते हुए कहा गया है, जो केवल निम्नलिखित में से किसी एक यह सभी विषयों से संबंधित हो –




 

(1) किसी का आरोपण उत्सादन, परिहार बदलना या विनय मन करना ,

(2) भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने का विनियमन करना या प्रत्याभूत करना ,

(3) भारत की संचित निधि अथवा आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा और उसमें धन डालना है, उसमें से निकालना।

(4) भारत की संचित निधि में धन का विनियोग करना।

(5) किसी व्यय को भारत की संचित निधि पर भारत वह घोषित करना।

(6) भारत की संचित निधि के या भारत के लोग लेखे में मद में धन प्राप्त करना, ऐसे धन की अभिरक्षा या निकासी या संघ राज्य के हिसाब का लेखा परीक्षण करना।

(7) उपबंध बद से अवध अब तक में उल्लेखित विषयों में से किसी का अनुषांगिक कोई विषय का उपबंध करना।




 

अनुच्छेद 111 (2) में या स्पष्ट किया गया है , कि कोई विधेयक मात्र इस कारण से धन विधेयक नहीं हो जाएगा, कि वह निम्नलिखित की व्यवस्था करता है |

 

(a) जुर्माना या अन्य अर्थदंड ओ का आरोपण या

(b) लाइसेंसों के लिए शुल्क का अथवा की गई सेवाओं के लिए सड़कों का उपबंध, या

(c) किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिए किसी कर लगाने का उपबंध ,

 

Money Bill धन विधेयकों को पारित करने की प्रक्रिया –

 

धन विधायकों को संसद में पारित करने के लिए संविधान में निम्नलिखित विशिष्ट प्रक्रिया अपनाई गई हैं –




 

  1. धन विधेयक को केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है। और वह भी राष्ट्रपति की सिफारिश पर अनुच्छेद 109 (1) लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद विधेयक को राज्यसभा के पास उसकी सिफारिश के लिए भेजा जाता है। जिसे उसे अपनी सिफारिश के साथ लोकसभा को वापस कर देना होता है।
  2. लोक सभा राज्य सभा द्वारा की गई किसी या अन्य सभी सिफारिशों को स्वीकृत कर सकती है। या अस्वीकृत कर सकती है, यदि लोक सभा किसे सिफारिश को स्वीकार कर लेती है, तो विधायक उस सिफारिश के साथ दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाएगा।
  3. यदि राज्यसभा बिल को लोकसभा के पास 14 दिन की अवधि के भीतर वापस नहीं भेजती तो विधेयक को दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पास किया हुआ मान लिया जाएगा, उस रूप में लोकसभा ने उसे राज्यसभा के पास भेजा था।
  4. इसके पश्चात विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए उसके पास भेजा जाएगा, राष्ट्रपति या तो विधेयक पर अपनी अनुमति दे सकता है , या अनुमति को रोक सकता है। किंतु वह पुनर्विचार के लिए विधेयक को सदनों को पास नहीं लौटा सकता।
  5. वस्तुतः राष्ट्रपति द्वारा धन विधेयक पर अपनी अनुमति ना देना व्यवहारिकता से परे है, क्योंकि ऐसा विधेयक सदन में राष्ट्रपति के अनुमति के पश्चात ही पेश किया जाता है।  इस प्रकार राष्ट्रपति धन विधेयक पर अपनी अनुमति देने के लिए बाध्य है।

 

कोई विधेयक धन विधेयक है, अथवा नहीं।

 

संबंधित प्रश्न का निर्माण – अनुच्छेद 110 (3) के अनुसार यदि ऐसा कोई प्रश्न उठाता है, कि कोई विधेयक धन विधेयक है, अथवा नहीं।  तो उस पर लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा , इसी कारण जब कोई धन विधेयक राज्यसभा को भेजा जाता है, अथवा राष्ट्रपति के अनुमति के लिए भेजा जाता है , तो उस पर लोकसभा के अध्यक्ष के हस्ताक्षर सहित यह प्रमाण संकेत रहता है, कि वह धन विधेयक है।




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