What is Juvenile Court in India | किशोर न्यायालय क्या होते हैं

What is Juvenile Court in India | किशोर न्यायालय क्या होते हैं
What is Juvenile Court in India | किशोर न्यायालय क्या होते हैं
Spread the love

What is Juvenile Court in India – किशोर न्यायालय क्या होते हैं

 

किशोर न्यायालय जुवेनाइल कोर्ट – विश्व में सर्वप्रथम किशोर  न्यायालय अमेरिका के शिकागो नगर में सन 1899  में स्थापित हुआ था। परंतु इसके पूर्व भी इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया कनाडा तथा स्विट्जरलैंड में ऐसे कानून पारित किए जा चुके थे जिनमें बाल अपराधियों के लिए न्यायिक व्यवस्था बालिग  अपराधियों से अलग थी सन 1870 में अमेरिका के बोस्टन नगर में न्यायालयों की कार्य पद्धति में संशोधन करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया। Also Read क्षमादान – सीआर पी सी की धारा 306 | Cr.P.C Section 306 in Hindi | Dhara 306 Cr.Pc in Hindi

 

प्रस्ताव में कहा गया कि बाल अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई अलग प्रकार से होनी चाहिए। सन 1877 में न्यूयॉर्क में स्थापित न्यायालय ने अपने एक प्रस्ताव में कहा कि 16 साल के बालको को ना तो अपराधियों के साथ जेल में रखा जाए और ना ही उन्हें न्याय कक्ष में पुलिस की हिरासत में हथकड़ी डाल कर पेश किया जाए।  Also Read Nature of Criminology in Hindi – अपराध शास्त्र की प्रकृति का वर्णन




इस प्रस्ताव को स्वीकार किया गया और 20 साल के दौरान अमेरिका के अनेक नगरों में किशोर न्यायालय (Juvenile Court) की स्थापना की गई। अमेरिका में उत्पन्न हुई यह परंपरा विश्व के अन्य देशों में भी अपनी महत्व के आधार पर शीघ्र ही अपना ली गई और किशोर न्यायालय की स्थापना का एक आंदोलन साथ छोड़ गया।  बीसवीं शताब्दी में बाल अपराधियों के प्रति वैज्ञानिक उपचार संबंधी विचारों में परिवर्तन आने से यह सोचा जाने लगा कि बाल अपराधियों के अभियोग के लिए अलग न्यायालय स्थापित किया जाना चाहिए।

 

सर्वप्रथम सन 1915 में मुंबई रेल एडमिनिस्ट्रेशन रिपोर्ट ने उसकी आवश्यकता पर बल दिया गया। परंतु भारत में सबसे पहला किशोर न्यायालय (Juvenile Court) सन 1922 में कोलकाता में खोला गया उसके बाद सन् 1927 में मुंबई में और सन 1930 में मद्रास में खोला गया। Also Read Judgement on Education Loan – ख़राब क्रेडिट स्कोर होने के बावजूद एजुकेशन लोन देना पड़ेगा

भारत में किशोर न्यायालय की विशेषताएँ क्या हैं – What are the characteristics of Juvenile Court in India?

भारत में वर्तमान में जुवेनाइल जस्टिस कानून बच्चों की 2 श्रेणियों से संबंधित है – कानून और बच्चों की देखभाल और सुरक्षा । 18 वर्ष से कम आयु के उन बच्चों का परीक्षण भारत में एक विशेष न्यायिक क्षेत्र में आता है। उन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड्स या जुवेनाइल कोर्ट्स द्वारा संभाला जाता है, जो किशोर अपराधियों को उनकी सुनवाई और हिरासत के दौरान देखभाल और मार्गदर्शन प्रदान करने वाले होते हैं।




इस किशोर न्याय कानून और आपराधिक संहिता प्रक्रिया के प्रावधानों के तहत, बच्चों को नियमित आपराधिक अदालतों में नहीं ले जाना चाहिए। एक अलग अदालत का उद्देश्य यह है कि इसका उद्देश्य सामाजिक-कानूनी पुनर्वास और सुधार है न कि सजा। इससे पहले, बाल अपराध से निपटने वाली इन विशेष अदालतों को जुवेनाइल कोर्ट कहा जाता था और कई संशोधनों और सुधारों के साथ इन अदालतों को किशोर न्याय बोर्ड (JJB) में तब्दील किया गया ताकि वे अधिक बाल मित्रवत और सुधारवादी बन सकें। Also Read Trial Before Session Court in Hindi – सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण

किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) संशोधन बिल, 2018

 

    • किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) एक्ट, 2015 कहता है कि अदालत द्वारा एडॉप्शन के आदेश देने के बाद बच्चे के एडॉप्शन का काम पूरा हो जाता है। बिल में प्रावधान किया गया है कि अदालत की बजाय डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट एडॉप्शन के आदेश देगा।
    • बिल किसी अदालत में एडॉप्शन से संबंधित सभी लंबित मामलों को उस क्षेत्र के क्षेत्राधिकार वाले डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट को ट्रांसफर करने का प्रयास करता है।




Who is Juvenile – किशोर कौन है

 

कानून के अनुसार किशोर कौन है? भारतीय संदर्भ में, एक किशोर या बच्चा कोई भी व्यक्ति है जो 18 वर्ष से कम आयु का है। हालाँकि, भारतीय दंड संहिता में कहा गया है कि सात वर्ष की आयु प्राप्त करने तक किसी बच्चे से किसी अपराध के लिए सजा नहीं दी जा सकती।

 

भारतीय संविधान में जुवेनाइल का अर्थ है कि यदि कोई बच्चा 18 वर्ष से कम उम्र का है, तो भारतीय कानूनों के तहत, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 2 (के) अधिनियम, 2000 “किशोर” या “चाइल्ड” के रूप में परिभाषित करता है। एक व्यक्ति जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है।

 

Also Read




  1. IPC Section 331 in Hindi | Voluntarily Causing Grievous Hurt to Extort Confession – Dhara 331
  2. IPC Section 328 in Hindi | Causing hurt by Means of Poison | Section 328 IPC | Dhara 326 Kya Hai
  3. सजा में कमी (दंड में न्यूनता) कब हो सकती है | Reduction in Punishment
  4. What is White Collor Crime in Hindi – श्वेत पोश अपराध के प्रमुख कारण क्या है
  5. What is Meant by Salary in Income Tax Act – How to Compute Taxable Salary
  6. Meaning of Criminology and Main Division of Criminology in Hindi – अपराध शास्त्र का अर्थ
  7. कोविड-19 आईपीसी की धारा 271 Quarantine Rule
  8. ब्रिकी विलेख के पंजीकरण के दौरान दोनों पक्षों का उपस्थित रहना जरूरी नहीं है
  9. Weight Lose Tips
  10. क्षमादान – सीआर पी सी की धारा 306 | Cr.P.C Section 306 in Hindi | Dhara 306 Cr.Pc in Hindi
  11. IPC Section 328 in Hindi | Causing hurt by Means of Poison | Section 328 IPC | Dhara 326 Kya Hai
  12. Motivational Stories – Health Tips

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*