What is IPC 498a in Hindi Explained | भारतीय दंड सहिंता 1860 की धारा 498a क्या है

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What is IPC 498a in Hindi – भारतीय दंड सहिंता 1860 की धारा 498a क्या है

 

नमस्कार दोस्तों आज इस पोस्ट में, मैं आपको बताऊंगी धारा 498 ए आईपीसी के बारे में। धारा  498-A से संबंधित है जो भारतीय समाज के लिए एक अभिशाप है। भारत में दहेज प्रथा के खिलाफ समय-समय पर कानून बनते रहते हैं। और उनमें संशोधन भी होते रहते हैं इसी में एक कानून है धारा आईपीसी 498 ए (IPC 498a Hindi) जिसके बारे में जानना बहुत जरूरी है चलिए जानते हैं कि IPC 498a Hindi के बारे में।




Section 498A in The Indian Penal Code

376 [498A. Husband or relative of husband of a woman subjecting her to cruelty.—Whoever, being the husband or the relative of the husband of a woman, subjects such woman to cruelty shall be pun­ished with imprisonment for a term which may extend to three years and shall also be liable to fine. Explanation.—For the purpose of this section, “cruelty” means—

(a) any wilful conduct which is of such a nature as is likely to drive the woman to commit suicide or to cause grave injury or danger to life, limb or health (whether mental or physical) of the woman; or
(b) harassment of the woman where such harassment is with a view to coercing her or any person related to her to meet any unlawful demand for any property or valuable security or is on account of failure by her or any person related to her to meet such demand.]

IPC 498a Hindi

 

आईपीसी 498 क्या है :- Section  498 ए आईपीसी की जरूरत क्यों पड़ी, इसकी वजह है परिवार के अंदर महिलाओं के साथ होने वाले हिंसा और हिंसा होने का सबसे प्रमुख कारण है दहेज। इसी की वजह से सरकार पर दबाव बढ़ा और धारा 498 ए आईपीसी को जोड़ा गया। भारतीय दंड संहिता 1860 के अनुसार 498 ए आईपीसी अगर कोई व्यक्ति या उसके रिश्तेदार महिला के साथ क्रूरता करते हैं।  उस महिला को प्रताड़ित करते हैं तो उस अवस्था में उस व्यक्ति और उसके नातेदार पर IPC 498a Hindi लगाई जाती है।  इस धारा में 3 साल (IPC 498a Punishment) की सजा और आर्थिक दंड भी लगाया जाता है।

 

स्पष्टीकरण

 

  1. इस सेक्शन 498a IPC को लगाने के लिए किसी महिला के साथ क्रूरता होनी जरूरी होती है जैसे अगर कोई आचरण किसी महिला को आत्महत्या करने के लिए उत्साहित करता है।
  2. उस स्त्री के किसी अंग या उसके स्वास्थ्य को जानबूझकर क्षति पहुंचाने की कोशिश करें। किसी महिला को तंग करना किसी मूल्यवान वस्तु या प्रतिभूति को मांगना। उसके लिए परेशान करना और उस मांग को पूरा ना कर पाने पर उस महिला को प्रताड़ित करना।




धारा 498 ए को भारतीय दंड संहिता 1860 में साल 1983 को जोड़ा गया था

 

IPC 498a Hindi जिसका मकसद ससुराल में पति या उसके रिश्तेदारों के द्वारा प्रताड़ित होने पर महिलाओं का बचाव करना था। इस धारा में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर धारा 498 ए आईपीसी लगाई जाती है जिसके लिए 3 साल की सजा (IPC 498a Punishment) और आर्थिक दंड लगाया जाता है। इस धारा में क्रूरता को बहुत ही व्यापक रूप से परिभाषित किया जाता है।  IPC 498a Hindi में बहुत सी बातों को शामिल किया गया है जैसे :-




  1. किसी महिला को शारीरिक क्षति पहुंचाना।
  2. किसी महिला को किसी भी तरह से किसी बात के लिए ब्लैकमेल करना।
  3. महिला को पति या उसके घर वालों के द्वारा मूल्यवान संपत्ति या प्रतिभूति के डिमांड करना। वह IPC 498a Hindi के अंतर्गत अपराध है।
  4. किसी महिला के साथ गैरकानूनी संबंध बनाने की कोशिश करना धारा 498 आईपीसी में अपराध है।
  5. महिला का किसी भी तरह से शोषण करना किसी महिला को आत्महत्या करने पर उकसाना या  उसको मजबूर करना क्रूरता है।  जिसे 498 ए आईपीसी के तहत बुक किया जाएगा।

भारतीय दंड संहिता 1860 IPC 498a in Hindi भारतीय दंड संहिता 1860, 498 ए आईपीसी के तहत कोई भी अपराध संगेय अपराध है। जिसके अंतर्गत पुलिस अपराधी को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है पूरी तरह से पुलिस के विवेक अधिकार पर आधारित है। इस अपराध कि सूचना किसी भी पुलिस स्टेशन में दी जा सकती है। IPC 498a Section की सूचना जरूरी नहीं है कि वह महिला ही पुलिस को देगी। इसकी जानकारी महिला का कोई रिश्तेदार या कोई भी अनजान व्यक्ति भी दे सकता है। यह अपराध एक संगीन अपराध है और गैर जमानती अपराध भी है।




आईपीसी 498 ए सेक्शन की शिकायत कब की जाएगी ?

 

भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के अपराध की सूचना इस धारा के अंतर्गत 3 साल के अंदर किसी पुलिस स्टेशन में की जा सकती है। धारा 498 ए आईपीसी मे कोई भी कोर्ट तब तक सुनवाई नहीं करती जब तक पुलिस अपनी रिपोर्ट तैयार करके कोर्ट में पेश ना करें। एक बार जब पुलिस अपने रिपोर्ट तैयार कर लेती है तभी कोर्ट उस पर सुनवाई कर सकती है।

 

498 ए आईपीसी का दुरुपयोग

 

समय के साथ जिस धारा 498 ए आईपीसी को महिलाओं की रक्षा करने के लिए बनाया गया था।  महिलाओं ने उसका बहुत ज्यादा दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। दहेज के केस में IPC 498a in Hindi का गलत इस्तेमाल होता है। महिला IPC 498a Section का इस्तेमाल करके पति और परिवार वालों पर झूठे इल्जाम लगा देती है। नतीजा यह हुआ कि इस तरह के मामलों की भरमार सी हो गई।

 

इन सारी बातों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशानिर्देश जारी किए।

 

सुप्रीम कोर्ट ने राजेश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (Read Judgement) मामले में IPC 498a Section पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों की बेंच न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की बेंच ने 27 जुलाई 2017 को अपने फैसले में कहा – कि धारा 498 ए आईपीसी का बहुत ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है इसलिए इस मामले में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। और यह तब तक नहीं होगी जब तक इस मामले में गठित की गई परिवार कल्याण समिति इसमें गिरफ्तारी की अनुमति नहीं देती। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हर जिला में परिवार कल्याण समिति की स्थापना करेगा। जो यह जांच करेगा की धारा 498 ए के तहत शिकायत की गई है वह सही है या नहीं। और उसके बाद ही पुलिस किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच शुरू करेगा और उसे गिरफ्तार करेगा।




लेकिन कुछ समय बाद ही सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की पीठ में जिसमें न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए.एम खानविलकर की तीन जजों की पीठ ने इस फैसले को पूरी तरह से पलट दिया।

 

इस बारे में कहा गया कि परिवार कल्याण समिति एक गैर न्यायिक समिति है जो कोर्ट का काम नहीं कर सकती। जो फैसला  राजेश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में दिया गया है। वह सीआरपीसी के खिलाफ है यह फैसला 2015 में सोशल एक्शन फोरम फॉर मानव अधिकार एंड अनदर (Read Judgement) नाम के एनजीओ के द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। इस याचिका में कहा गया था कि महिलाओं के लिए बनाई गई धारा 498 ए आईपीसी के तहत होने वाले अपराधों की निगरानी के लिए कोई एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। राजेश शर्मा मामले में फैसला आने के बाद याचिका दायर करके यह मांग की गई थी कि शादीशुदा महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले में तुरंत गिरफ्तारी शुरू की जानी चाहिए।

 

IPC 498a Section के बढ़ते झूठे मामलों में जमानत

 

IPC 498a Section के मामले में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की पीठ ने अपने फैसले में बिना वारंट के गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। और अग्रिम जमानत लेने के रास्ते भी खोल दिया है। अग्रिम जमानत देना न्यायाधीश के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है वकील के द्वारा पेश सबूत के आधार पर अग्रिम जमानत मंजूर की जा सकती है।

 

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