जानिये कर्फ्यू धारा 144 क्या है कैसे और कब लगाई जाती है

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जानिये कर्फ्यू धारा 144 क्या है कैसे और कब लगाई जाती है ?

आप सभी ने कर्फ्यू के बारे मे जरूर सुना होगा । इस पोस्ट मे मैने कर्फ्यू के बारे मे सभी जानकारिया देने की कोशिश की है । जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट लोक व्यवस्था और शांति को बनाए रखने के उद्देश्य से एवं शांति भंग होने की प्रबल संभावना के आधार पर सीआरपीसी की धारा 144 के अनुसार कर्फ्यू आदेश लागू कर सकता है।

कर्फ्यू आदेश वीर  सम्मत शर्तों के अनुसार ही लागू किया जाता है। 

* जब धारा 144 के अधीन उपचार करना राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट को आवश्यक महसूस हो तब लिखित आदेश में स्थित का पूर्ण कथन करते हुए उसकी  तमिल धारा 134 के  विधिक प्रावधानों से की जाएगी।
* साधारणतया इस प्रकार का आदेश 2 माह से ज्यादा जारी नहीं रखा जा सकता । लेकिन राज्य सरकार मानव जीवन स्वास्थ्य क्षेम के खतरे का निवारण करने के लिए अथवा बलवे या दंगे का निवारण करने के लिए आवश्यक समझे तो मजिस्ट्रेट द्वारा अवधि को बढ़ा सकती है। किंतु या अतिरिक्त अवधि उस तारीख से 6 माह से अधिक कि नहीं होगी जब मजिस्ट्रेट द्वारा किया गया पूर्ण आदेश समाप्त हो गया हो।
* दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन अधिनियम 2005 की धारा 16 द्वारा नई धारा 144 का द्वारा युद्ध, शहीद जुलूस या सामूहिक विवाह, सामूहिक व प्रशिक्षण  लोक शांति एवं लोग सुरक्षा के लिए प्रतिषेध कर सकती है।
* इस धारा के आदेश जारी की गई सार्वजनिक सूचना या आदेश किसी विशिष्ट व्यक्ति या समुदाय या संगठन के व्यक्तियों के प्रति भी संबोधित किया जा सकता है।
* सामान्यतया ऐसी सूचनाएं आदेश 3 माह के लिए होगा।
* राज्य सरकार आवश्यक समझे तो सूचना एवं आदेश की अवधि को बढ़ाया जा सकता है।




* लोक व्यवस्था और शांति बनाए रखना । विधि विरुद्ध जमाव की प्रशांति के लिए सीआरपीसी की धारा 129 के अनुसार सिविल बल का प्रयोग किया जा सकता है।
* कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस थाने का भार साधक अधिकारी( या उप निरीक्षण पंक्ति तक का अधिकारी)  5 या अधिक व्यक्तियों के गैरकानूनी जमाव को जिससे शांति भंग होने का खतरा हो बिखर जाने का आदेश दे सकता है। जमाव में मौजूद लोगों का कर्तव्य है कि वह आदेश अनुसार बिखर जाएं।
* यदि आदेश के बाद भी भीड़ जमा हो तितर-बितर नहीं होता है तो कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी बल प्रयोग द्वारा तितर-बितर करने की कार्यवाही कर सकता है।
धारा 138 के अनुसार गैर कानूनी  जमाव को बिखरने के लिए सशस्त्र बल का प्रयोग किया जा सकता है उच्चतम पंक्ति का कार्यालय मजिस्ट्रेट जो वहां उपस्थित हो यह कार्यवाही करवा सकता है।
* मजिस्ट्रेट उस अधिकारी द्वारा जो सशस्त्र बल के व्यक्तियों की किसी टुकड़ी को आदेश दे रहा हो अपेक्षा कर सकता है। कि गैर कानूनी जमाव को तितर-बितर कर दें एवं  जिन्हें दंडित करने के लिए गिरफ्तार करना आवश्यक है। उन्हें गिरफ्तार करे।




* धारा 131 के अनुसार जब कोई जवाब सुरक्षा एवं शांति के लिए खतरा उत्पन्न करते और कार्यपालक मजिस्ट्रेट के संपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा हो तो सशस्त्र बल का कोई भी आयुक्त या राजप्रपत्त या राजपत्रित अधिकारी आदेश देकर उस जमाव को छिन्न भिन्न  कर सकता है। इस कार्यवाही को करते हुए कार्यपालक मजिस्ट्रेट के संपर्क  हो जाते हैं, तो फिर वह कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेशों के अनुसार कार्य करेगा।
* धारा 132 मे क्या व्यवस्था की गई है, कि यदि उपरोक्त धारा 129 ,130 व 131 के आधीन सदभावना पूर्वक किए गए कार्य के लिए सशस्त्र बल के किसी भी व्यक्ति के खिलाफ केंद्रीय सरकार की अनुमति के बिना मुकदमा नहीं चलाया जा सकता । अन्य मामले में राज्य सरकार की अनुमति लेना आवश्यक होता है। इसी प्रकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट और संबंधित पुलिस अधिकारी के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि उसने कोई अपराध किया है।

 लोक न्यूसेंस।

* सीआर .पी.सी की धारा 133 लोग न्यूसेंस को रेखांकित करती है। लोक न्यूसेंस का निवारण जिला मजिस्ट्रेट उपखंड मजिस्ट्रेट राज्य सरकार द्वारा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए नियुक्त व्यक्ति कार्यपालक मजिस्ट्रेट या किसी पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाता है।
* सार्वजनिक स्थान, मार्ग, नदी, जलसरणी ( कुआ, तालाब, बावड़ी)  जो विधिपूर्वक उपयोग में लाई जाती है, वहां विधि विरुद्ध बाधा को लोग न्यूसेंस माना गया है। ऐसी बाधा या न्यूसेंस को हटा दिया जाता है।
* किसी ऐसे व्यापारी आजीविका को चलाना या उसके माल को रखना जिससे लोगों के लिए स्वास्थ्य और शरीर सुख को खतरा हो जाए, तो माल या वस्तु हटा दी जानी चाहिए और ऐसा व्यापार विधि के अनुसार ही संचालित करने दिया जाए।
* कोई निर्माण कार्य किसी पदार्थ का उपयोग अग्नि कांड और विस्फोट का कारण बने वहां निर्माण कार्य बंद करवाया जाना चाहिए और उक्त पदार्थ का उपयोग रोक देना चाहिए।




* कोई भवन ,तंबू ,वृक्ष अथवा इस प्रकार का कोई निर्माण जिसके गिरने की संभावना हो और इस संभावना से क्षति होना भी संभावित हो।  तब ऐसे भवन तंबू अथवा वृक्ष व अन्य निर्माण की मरम्मत होनी चाहिए अथवा उसे आधार देना चाहिए। अन्यथा फिर हटा देना चाहिए।
* किसी भयानक जीव जंतु के कारण खतरा हो तो विधि के अनुसार आदेश करके उसे नष्ट किया जाए या उसे पकड़ लिया जाए या उसको हटा दिया जाए।
* भूमि अथवा जल का दावा सुखाधिकार के रूप में हो तो दोनों पक्षकारों को न्यायालय में उसके अभी कथन के लिए बुलाया जा सकता है जहां दोनों पक्ष कार अपने वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखेंगे।
* लोक न्यूसेंस के मामले में धारा 188 के अनुसार दोषी पर मुकदमा चलाया जा सकता है। और दोषी होने पर उसे दंडित भी किया जा सकता है। इसके लिए 6 माह की कारावास दिया और ₹1000 जुर्माना अथवा दोनों का दंड विधि अनुसार देय है।।

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