स्वेच्छा से उठाई गई क्षति – क्षति नहीं होती – इस तथ्य को अपकृत्य अपवाद के अंतर्गत व्यक्त करिए

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स्वेच्छा से उठाई गई क्षति – क्षति नहीं- (volenti non fit injuria explained in hindi) जानभूझकर नुक्सान उठाना नुकसान नहीं होता –

 

स्वेच्छा से उठाई गई क्षति, क्षति की श्रेणी में नहीं आती। यह अपकृत्य में अपवादी की श्रेणी में होता है। जिसके अनुसार वादी की सहमति से यह कार्य कानून की दृष्टि में क्षतिकारी नहीं होतें, तथा इसीलिए अनुयोज्य  भी नहीं होते। सुरक्षा से उठाई गई हानि कभी भी कानूनी क्षति नहीं मानी जाती है। और ना उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही की जाती है। इसी सिद्धांत को सुरक्षा स्वेच्छा से उठाई गई क्षति क्षति नहीं होती के सूत्र से अभिव्यक्त किया जाता है।
इसका अर्थ है, कि जहां व्यक्त  स्वेच्छा से नुकसान उठाता है। वहां कानूनी क्षति नहीं होती है। स्मिथ बनाम बेकर में कहा गया है, कि यदि कोई व्यक्ति अपने आप किसी घटना को आमंत्रित करता है, या उसकी सहमति से वह घटना घटित होती है, तो भले ही वह उसके परिणाम से आप हानि उठाएं। वह इस प्रकार अनुच्छेद या गलत नहीं समझी जाएगी। कि उस पर कोई कानूनी कार्यवाही की जाए, सिद्धांत दिया है। कि प्रत्येक व्यक्ति अपने हित का स्वयं अच्छा निर्णायक होता है।
यदि वह जानबूझकर कोई खतरा मोल लेता है। तो कानून की दृष्टि में उसकी वह क्षति महत्वपूर्ण नहीं समझी जाती। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति अपने किसी अधिकार को त्याग देता है। तो वह उसका फिर से लाभ ना ले सकेगा। उक्ति के अंतर्गत उपलब्ध बचाओ का आधार सहमति या अनुज्ञप्ति होती हैं।

उपरोक्त वर्णित अपराध से संबंधित कुछ वाद (volenti non fit injuria explained in hindi)

1- इंपिरियम केमिकल इंडस्ट्रीज बनाम सेट वेल के मामले में वादी तथा उसका भाई पत्थर की खदान में काम कर रहे थे। उन लोगों ने प्रतिवादी की आज्ञा के उल्लंघन का निश्चय किया। बिना आवश्यक सावधानी के विस्फोटक का स्वयं परीक्षण करना चाहिए। जिसके परिणाम स्वरूप एक विस्फोट हुआ। और वादी घायल हो गया। उसमें प्रतिवादी मालिकों के विरुद्ध नुकसानी का मुकदमा चलाया, जिसमें  यह कहा कि उसके भाई की असावधानी से यह दुर्घटना हुई है। और क्योंकि भाई ने अपनी नौकरी की अवधि में यह सावधानी की है। इसीलिए मालिक परोक्ष रूप से दायी होगा। वादी ने स्वयं उस आपत्ति के लिए सहमति दी थी। अतः वॉलेंटी नॉन फिट इंजुरिया का सिद्धांत लागू हुआ। और दावा  खारिज कर दिया गया।
यह उक्ति साशय या महत्वपूर्ण कार्यों पर लागू होती है। जो अन्य प्रकार से कष्टदायक कहे जा सकते हैं। जैसे मुक्केबाजी या ऑपरेशन में कष्ट उठाना। किसी व्यक्ति के बिना पूछे उसके दांत उखाड़ लेना। उस पर प्रहार होगा। लेकिन पूछ कर दांत निकालना सहमति से किया गया कार्य माना जायेगा।

आवश्यक शर्तें – उपर्युक्त उक्ति के लागू होने के लिए नियम शर्ते आवश्यक है 

1- खतरे का ज्ञान होना, खतरा उठाने के लिए सहमति देने से भिन्न है – ऐसे मामले में खतरे का ज्ञान किसी रूप में होना आवश्यक होता है। किंतु इस प्रकार का ज्ञान आवश्यक रूप से सहमति नहीं हो जाता। यह तो परिस्थितियों के अनुसार सहमति को मात्र कमजोरियां दृढ़ बना सकता है। यह अपवाद सहमति पर आधारित है। ज्ञान पर आधारित नहीं है। सिर्फ खतरे का ज्ञान होने से ही खतरा उठाने के लिए सहमति नहीं मान ली जाती है।
 स्मिथ बनाम बेकर के वाद में वादी एक पत्थर काटने वाले कारखाने में ऐसे स्थान पर काम करता था। जिसके ऊपर ट्रेन द्वारा भारी भारी पत्थरों के टुकड़े-टुकड़े लटकाये पाए जाते थे। मालिक एवं वादी दोनों को इस बात का ज्ञान था। कि वहां पत्थर गिरने का भय सदैव था। किंतु जब कभी पत्थर लटकाया जाता था। उस छड़ की सूचना वादी को नहीं दी जाती थी। एक पत्थर किसी दिन ट्रेन से वादी के ऊपर गिरा और वह गंभीर रूप से आहत हुआ।  हाउस ऑफ लार्ड्स  ने निर्णय लिया कि प्रगतिवादी मालिक नुकसानी के लिए दायी है। वादी को जो क्षति हुई है, वह मालिक के नौकरों की असावधानी से हुई। क्योंकि उन्होंने खतरे की सूचना वादी को नहीं दी। जिसके लिए वे कर्तव्यबध्य थे।
 जानकारी संपत्ति का प्रमाण हो सकती है। किंतु इससे अधिक नहीं इस प्रकार बहुत से परिस्थितियों में अनेक कारणों से किसी बात को जान लेने से यह निष्कर्ष निकाला जाएगा, कि जानने वाले व्यक्ति ने उसके विषय में सहमति भी दे दी है। (volenti non fit injuria explained in hindi)
2-  संपत्ति स्वेच्छा से दी गई हो – संपत्ति स्वतंत्र होनी चाहिए अर्थात् संपर्क ना तो दबाव द्वारा और ना ही प्रभाव का प्रयोग का प्राप्त की गई हो। इस प्रकार यह धोखा है। दूरदर्शन द्वारा संपत्ति प्राप्त की गई है। तो यह संपत्ति स्वतंत्र तथा सुरक्षा से दी गई संपत्ति नहीं होगी।
एक प्रमुख बाद आर०  बनाम विलिएम्स  के वाद में अपीलार्थी एक 16 वर्षीय बालिका का संगीत शिक्षक था। उसने उसके साथ इस बहाने से संभोग किया, कि उसकी आवाज को सुधारने के लिए वह कार्य कर रहा था। बालिका को यह ज्ञान ना था  कि वह उसके साथ बलात्कार करने जा रहा था। अन्यथा वह उसके लिए संपत्ति ना देती, क्योंकि उसके कार्य ही प्रकृति को ठीक से समझा नहीं था। न्यायालय ने संगीत शिक्षक को  बलात्कार का दोषी ठहराया।
 किंतु संपत्ति जब खतरे का ज्ञान होने के साथ स्वेच्छा से दी जाती है। तब सुरक्षा से उठाई गई क्षति का सूत्र लागू होता है। उदाहरणार्थ स्वरूप बकपिट बनाम ओट्स के मामले में वादी एक बालक था। जो कि प्रतिवादी की कार से स्वेच्छा से जाने के लिए सहमत हो गया जबकि प्रतिवादी स्वयं एक बालक था किसी ऐसे अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता था जिसे स्वयं स्वेच्छा से छोड़ दिया था। इस प्रकार यह उक्ति कि संपत्ति के से किया गया कार्य अधिकारी नहीं अत:प्रतिवाद में सफल हुई।

यदि वादी स्वेच्छा से संपत्ति व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र नहीं है, तो संपत्ति के प्रतिवाद का लाभ प्रतिवादी को नहीं मिलेगा।

उदाहरण स्वरूप वह बोवाटर बनाम राउले  रेजिस कारपोरेशन में वादी प्रतिवादी के यहां घोड़ा गाड़ी चलाने के लिए नौकर था। घोड़े के दुलत्ती मारने की प्रवृति के बारे में वादी और प्रतिवादी दोनों को ज्ञान था। वादी ने प्रतिवादी मालिक के आदेश का पालन करते हुए घोड़ा हाथ में स्वीकार कर लिया। जब वह घोड़े को जोतने के लिए अस्तबल से निकालने लगा तो घोड़े ने दोलत्ती मारी। जिनसे वादी घायल हो गया। न्यायालय ने यहां वॉलेंटी नॉन फिट इंजुरिया, का सिद्धांत नहीं लागू किया और कहा कि वादी नुकसानी का हकदार है। वह मालिक के आदेश पालन के लिए मजबूर था। और अपने स्वतंत्र विचार के अनुसार वह घोड़े को पकड़ने का कभी साहस न करता। इस स्थिति में उसका खतरे का ज्ञान खतरे की संपत्ति नहीं चरितार्थ करता।
इसी प्रकार आर्थिक विपन्नता के कारण दी गई संपत्ति, स्वतंत्र संपत्ति श्रेणी में नहीं आएगी। क्योंकि वादी को आर्थिक विपन्नता के कारण चुनाव करने की स्वतंत्रता नहीं प्राप्त होगी। वादी की संपत्ति स्वतंत्र रूप से स्वेच्छाया से दी गई हो। उसके लिए यह आवश्यक होता है, कि उसे चुनाव करने की स्वतंत्रता प्राप्त हो।
3- गैर कानूनी कार्य के लिए संपत्ति नहीं दी जा सकती  – जिस कार्य के लिए संपत्ति दी गई हो वह गैरकानूनी नहीं होना चाहिए। जैसे तेज धार वाले हथियारों से द्वंद युद्ध करना या मुक्केबाजी में भाग लेना आदि।  संपत्ति किसी गैर कानूनी कार्य को कानूनी नहीं बना सकती है। यदि अपकृत्य अपराध रूप में है, तो संपत्ति उसे वैध नहीं बना सकती है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को अपराध करने की अनुमति नहीं दे सकता है।

 बचाव के मामले

बचाव के मामले विशेष प्रकार के मामले होते हैं। जब कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के शरीर या संपत्ति को किसी विशेष खतरे से रक्षा करते हुए क्षतिग्रस्त होता है। तो इसे बचाव का मामला कहते हैं। और इसमें उपर्युक्त सूखती प्रतिवाद के रूप में लागू नहीं होते क्योंकि बचाव करने वाला व्यक्ति कर्तव्य भावना से प्रेरित होकर बचाव कार्य में संलग्न होता है। यह स्वाभाविक है, कि जहां कर्तव्य है, वहां चुनाव के स्वतंत्रता नहीं हो सकती। इस बिंदु पर हेन्स बनाम हारउड का वाद बहुत महत्वपूर्ण है।

 विवक्षित संपत्ति

 

 सामान्यत:  असावधानी पूर्ण कार्य के लिए पहले से संपत्ति नहीं दी जा सकती है। क्योंकि असावधानी पूर्ण कार्य से उत्पन्न होने वाले खतरे का पूर्वकालिक ज्ञान होना संभव नहीं है। और बिना खतरे की जानकारी हुए उसे वहीं करने की संपत्ति नहीं दी जा सकती। किंतु कुछ परिस्थितियों में वादी यह अपेक्षा नहीं कर सकता, कि प्रतिवादी उसकी सुरक्षा का ध्यान रखेगा। ऐसी परिस्थिति में यद्यपि वादी प्रगति प्रतिवादी के उपेक्षा पूर्ण कार्य से उत्पन्न होने वाली क्षति के लिए संपत्ति नहीं देता, फिर भी वह प्रतिवादी से यह आशा नहीं रख सकता। की प्रतिवादी उसकी सुरक्षा का समुचित ध्यान रखेगा। इस प्रकार की परिस्थिति मैच या किसी खेल प्रतियोगिता के मामले में उत्पन्न होती हैं। यदि कोई दर्शक खेल प्रतियोगिता के दौरान क्षतिग्रस्त हो जाता है। तो वह क्षतिपूर्ति की मांग नहीं कर सकता। बशर्ते कि खेल प्रतियोगिता उससे संबंधित नियमों के अधीन  आयोजित की जा रही हो, तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले दक्ष व्यक्ति हों।।
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