Trial Before Session Court in Hindi – सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण

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Trial Before Session Court – सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण

 

अदालत में किसी अपराधी के विरुद्ध अपराध के आरोप की जानकारी से उसके निर्णय तक के समस्त कार्यवाही विचारण के कानूनी नाम से संबोधित किया जाता है। लेकिन अपराधों के लिए विभिन्न अदालतों में विभिन्न ढंग से विचार किया जाता है। लेकिन विचारण का एकमात्र उद्देश्य यही होता है। की समग्र जानकारी एवं साक्षो की रोशनी में न्यायपूर्ण निर्णय दिया जा सके। समानतया  7 वर्ष से अधिक की दंडा विधि वाले पराकरण सेशन न्यायालय द्वारा समय सुने जाते हैं। Read – What is Bail – Expline the Types of Bail in Indi | जमानत क्या है जमानत के प्रकार




सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण शीर्षक के अंतर्गत विचारण चरण दर चरण किस प्रकार आगे बढ़ता है। यह दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं के अनुसार निम्न प्रकार से दर्शाया गया है।

  1. विचारण का संचालन लोक अभियोजक द्वारा किया जाना।
  2. भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 225 में इस बात का प्रावधान किया गया है। कि अभियोजन का संचालन लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर यथा पी.सी) द्वारा किया जाएगा। अतः लोक अभियोजक विचारण का महत्वपूर्ण अंग है।

अभियोजन के मामले में कथन का आरंभ – Start of Statement in Case of Prosecution

 

जब अभियोग धारा 209 के आधीन अपराधिक कृत्य के कारण न्यायालय में उपस्थित होता है अथवा उपस्थित किया जाता है तो लोक अभियोजन अपराध का कथन जानकारी आरंभ करते हुए बताएगा कि अभियुक्त के अपराध को किस साक्ष्य में साबित करने की स्थापन करता है। धारा 226 के आधीन इसे अभियोजन के मामले में कथन का आरंभ कहा जाता है।

 

उन्मोचन – Release Section 227

 

सीआर.पी.सी की धारा 227 के अनुसार यदि मामले के अभिलेख और उसके साथ दिए गए दस्तावेजों पर विचार कर लेने पर और अभियुक्त एवं अभियोजक की इस निमित्त सुनवाई कर लेने के पश्चात न्यायाधीश यह समझते हैं कि अभियुक्त के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। तो वह अभियुक्त को आरोप मुक्त कर देंगे। और ऐसा करने के कारणों को लेखा करेंगे। इसे उन्मोचन के नाम से जाना जाता है। Read – Supreme Court Judgement on Crpc 125 | पति इस आधार पर अपनी पत्नी को तलाक़ नहीं दे सकता कि वह अब उसके साथ नहीं रह रही है




आरोप तय करना – Set Charges Sec 228

 

धारा 228 सीआरपीसी के अनुसार अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है जोः-

1- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है तो वह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तय करके मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेज सकते हैं।
2- यदि मामला सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है तो अभियुक्त के विरुद्ध आरोप लिखित रूप से तय किए जाएंगे।
3- आरोप तय होने के पश्चात न्यायाधीश द्वारा अभियुक्त को आरोप पढ़कर सुनाया व समझाया जाएगा।
4- सेशन न्यायाधीश द्वारा अभियुक्त से पूछा जाएगा कि वह आरोप स्वीकार करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है।

दोषी होने के अभिवचन – Plead Guilty Sec 229

 

धारा 229 के प्रावधान है कि यदि अभियुक्त दोषी होना स्वीकार कर लेता है तो न्यायाधीश उस जुर्म स्वीकारोक्ति कोल एक वध करेंगे और प्रकरण में दी सजा से दंडित करते हुए उस आधार पर उसे सुविवेका अनुसार दोष सिद्ध कर सकते हैं।

अभियोजन साक्ष्य के लिए – For Prosecution Evidence Sec 230

 

जब अभियुक्त जुर्म स्वीकार नहीं करता और विचारों का दावा करता है तो न्यायाधीश साक्षियों की परीक्षा करने के लिए तारीख नियत करेगा और अभियोजक के आवेदन पर किसी साक्षी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए आदेश जारी कर सकता है यह धारा 230 के अनुसार प्राविधिक है। readवकालतनामा क्या है और वकालतनामा कैसे भरा जाता है?




अभियोजन के लिए साक्षी – Witness for Prosecution Sec 321

 

1- धारा 321 के अनुसार निश्चित की गई तारीख को न्यायाधीश द्वारा वह सभी साक्ष्य स्वीकार किए जाते हैं जो अभियोजन के समर्थन में पेश किए जाते हैं।
2- न्यायाधीश अपने विवेका अनुसार गवाह की प्रति परीक्षा ( क्रॉक्स एग्जामिन) तब तक स्थगित करवा सकता है जब तक कि अन्य गवाह या गवाहों के परीक्षा ना कर ली जाए मजिस्ट्रेट चाहे तो गवाह को अतिरिक्त प्रति परीक्षा फरदर क्रॉस एग्जामिन के लिए पुनः बुला सकते हैं। read – What is White Collor Crime in Hindi 




दोष मुक्ति धारा 232 – Acquittal Section 232 Crpc

 

अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य लेने और अभियुक्त की परीक्षा करने और अभियोजक और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के पश्चात न्यायाधीश को लगता है कि अभी उनके द्वारा अपराध करने के साक्ष्य नहीं है तो न्यायाधीश अभियुक्त की दोषमुक्त के आदेश को अभी लिखित करेगा ऐसा धारा 232 के अनुसार किया जाता है। read – IPC Section 328 in Hindi | Causing hurt by Means of Poison | Section 328 IPC | Dhara 326 Kya Hai

 

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