सुप्रीम कोर्ट के सामने लड़के ने अपील दायर की, जिस पर न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनगौदर और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट धारा 482, सीआरपीसी के तहत अपने पहले आदेश को वापस नहीं ले सकता है, क्योंकि आपराधिक मामलों में हाईकोर्ट के द्वारा पारित आदेश को वापस लेने या समीक्षा करने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। यह नोट किया गया है कि, यदि स्कूल प्रमाण पत्र में दी गई जन्म तिथि को स्वीकार किया जाता है, तो लड़का 17 वर्ष का था, अर्थात् जब वह लड़की से शादी करता है तो अठारह वर्ष से कम आयु का होता है और इसलिए उस पर बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9 लागू नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने तब जांच की कि क्या धारा 9 में 18 से 21 साल के पुरुष को सजा दी जाएगी। इस तथ्य पर ध्यान देते हुए कि इस मामले में, लड़की एक वयस्क थी,

A Minor Man Cannot be Punished for Marrying an Adult Woman- Supreme Court | एक नाबालिग पुरुष को वयस्क महिला से विवाह करने पर सज़ा नहीं दी जा सकती

November 24, 2019 Legalhelpinhindi 1

RATHNAMMA & ORS. vs SUJATHAMMA & ORS.- एक नाबालिग पुरुष को वयस्क महिला से विवाह करने पर सज़ा नहीं दी जा सकती – सुप्रीम कोर्ट […]

कलकत्ता हाईकोर्ट - बिना वर्दी पहने चालान या ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने का मामला

High Court Judgement on IPC 306 | सुसाइड नोट में लगाए गए आरोप आईपीसी की धारा 306 के तहत केस बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है

November 12, 2019 Legalhelpinhindi 0

कर्नाटक हाईकोर्ट ने धारा 306 के तहत आरोपित एक अभियुक्त को अग्रिम जमानत देते हुए कहा है कि ”मृत्यु या सुसाइड नोट में लगाए गए […]