सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला एक कैदी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला एक कैदी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

Case Detail- Criminal Appeal

Diary Number- 17146-2006

Case Number Crl.A. No.-001411-001411 – 2018
Petitioner Name DNYANESHWAR SURESH BORKAR
Respondent Name THE STATE OF MAHARASHTRA
Petitioner’s Advocate
Respondent’s Advocate
Bench HON’BLE MR. JUSTICE A.K. SIKRI, HON’BLE MR. JUSTICE S. ABDUL NAZEER, HON’BLE MR. JUSTICE M.R. SHAH
Judgment By HON’BLE MR. JUSTICE M.R. SHAH

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

एक कैदी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जब उसने जेल में रहकर कविता लिखी और अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल है । यह फैसला 3 जजों की बेंच ने दिया । यह फैसला इस लिये भी लिया क्योंकि एक कैदी जिसको मौत की सजा दी गई थी । उसने जेल में ही रहकर स्नातक की डिग्री हासिल की और कविता लिखी । इसी पर गौर करते हुए उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया । यह मामला था ज्ञानेस्वर सुरेश बोलकर वर्सेस स्टेट ऑफ महाराष्ट्र का है ।

ज्ञानेश्वर सुरेश बोरकर को आईपीसी की धारा 302 आईपीसी की धारा 364 और आईपीसी की धारा 201 के तहत मौत की सजा सुनाई गई थी । क्योंकि उसने एक नाबालिक लड़की की हत्या कर दी थी । इस पीठ में न्यायमूर्ति ए के सिकरी, एस अब्दुल नजीर और एम आर साह शामिल थे । जिस समय में आरोपी ने अपराध किया था उस समय वह 22 साल का था । उसके बाद उसने 18 साल जेल में बिताए और जेल में रहकर उसने अच्छा व्यवहार दिखाया और स्नातक की डिग्री हासिल की । इसके अलावा कविताएं भी लिखी । इससे यह साबित होता है कि आरोपी सभ्य समाज में रहने के लायक बन रहा है । और वह अपनी गलती को भी स्वीकार करता है । इसलिए तीन जजों की बेंच ने यह समझा की अपील करता में सुधार हो सकता है । उसका पुनर्वास भी हो सकता है । इसलिए मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

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पीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस बात की संभावना है कि अब वह दोबारा इसी तरह का अपराध नहीं करेगा । और समाज के लिए खतरा भी नहीं बनेगा क्योंकि आरोपी कोई पेशेवर हत्यारा नहीं है और ना ही उसने कभी ऐसी सजा पाई है । इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए आरोपी की मौत की सजा को बदलकर आजीवन कारावास में बदल दिया गया ।

17146_2006_Judgement_20-Feb-2019





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