Is IPC 307 Bailable || IPC धारा 307 मे समझौता होने से केस खतम नही होगा-सुप्रीम कोर्ट 

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Is IPC 307 Bailable || IPC धारा 307 मे समझौता होने से केस खतम नही होगा-सुप्रीम कोर्ट

दोस्तो हमारा Supreme Court समय समय पर देश के हित मे कानूनो का सही उपयोग करके बहुत ही सराहनीय कदम उठाता है और Order Pass करता है ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आईपीसी के धारा 307 के तहत हुए अपराधों को इसलिए समाप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच सुलह हो गई है.  यह एक ग़ैर-प्रशम्य (non-compoundable) अपराध है।
कोर्ट ने State of Madhya Pradesh v. Kalyan Singh, मामले में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने हाइकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।
हाईकोर्ट ने वर्तमान आरोपी के ख़िलाफ़ आइपीसी की IPC धारा 307, 294 और 34 के ख़िलाफ़ लंबित मामले को निरस्त कर दिया था। आरोपी के आपराधिक रिकार्ड को देखते हुए पीठ ने कहा,
“आरोपी के ख़िलाफ़ गंभीर आरोपों को देखते हुए हमारी राय में हाईकोर्ट ने उसके ख़िलाफ़ IPC धारा 307 और 294 के तहत चल रही मामले की कार्रवाई को सिर्फ़ इसलिए समाप्त करके कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ मामले को सुलझा लिया है, एक बहुत बड़ी ग़लती की है।”
     हाईकोर्ट के आदेश को ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि Gulab Das and Ors. v. State of M.P. मामले में जो फ़ैसला दिया गया है उसके अनुसार शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच सुलह के बावजूद IPC धारा 307 के तहत दर्ज आपराधिक मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि गुलाब दास मामले में कोर्ट ने कहा की ऐसे अपराध जो कि सीरपीसी की धारा 320 के तहत प्रशम्य नहीं हैं, उन्हें माफ़ नहीं किया जा सकता क्योंकि मामले में आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच सुलह हो गई है।
यह याद दिलाना ज़रूरी है कि 2014 में, सुप्रीम कोर्ट ने Narinder Singh & Ors vs State Of Punjab मामले में पक्षकारों के बीच हुई सुलह को स्वीकार किया था और आरोपी के ख़िलाफ़ IPC धारा 307 के तहत चल रहे मामले को समाप्त कर दिया था।

State of M.P vs. Kalyan Sing & Ors.
Crimininal case appeal no.14 of 2019
Arising out of (Crl.) No. 5632 of 2014

SUPREME COURT का ये फैसला उन लोगो पर रोक लगायेगा जो अपराध करके शिकायत कर्ता से दबाव डालकर य पैसो का लालच देकर सुलह कर लेते है और अपने ऊपर चल रहै केस को खतम करवा लेते है ।

हत्या का प्रयास भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत दंडनीय है।

IPC 307. हत्या का प्रयास करना। — जो कोई भी इस तरह के इरादे या जानते हुए ऐसा काम करता है । उसके ऐसा करने से  किसी की मृत्यु होती है, तो इस धारा के तहत हत्या का दोषी होगा । जिसकी सजा दस साल तक का हो सकती है, और ऐसा व्यक्ति जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा । यदि इस तरह के काम से किसी व्यक्ति को चोट पहुंचती है, तो अपराधी आजीवन कारावास या दस साल की सजा के लिए उत्तरदायी होगा ।

उदाहरण

ए, निविदा वर्ष के बच्चे की मृत्यु के कारण के इरादे से, इसे एक निर्जन स्थान में उजागर करता है। ए ने इस धारा द्वारा परिभाषित अपराध किया है, हालांकि बच्चे की मृत्यु सुनिश्चित नहीं होती है।

सजा – 10 साल + जुर्माना
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय  के द्वारा सुना जाता है। यह गैर-जमानती अपराध है।

For More Detail Watch This Video:-

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