Supreme Court Judgement on Transfer Petition – Shruti Kaushal Vs Kaushal Bisht

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Supreme Court Judgement on Transfer Petition – Shruti Kaushal Vs Kaushal Bisht

 

आज हम बात कर रहे हैं एक लेटेस्ट जजमेंट हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 21 (A) यह जजमेंट इसलिए भी अहम है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने समझाया कि विवाह अधिनियम की धारा 21 (A) के तहत याचिका को ट्रांसफर करने की शक्ति का कब प्रयोग किया जाएगा तो सबसे पहले समझ लेते हैं कि-

 

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 21 (A) के क्या कहती है। – Shruti Kaushal Vs Kaushal Bisht

 

(HMA) हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 21 (A) के याचिकाओं को ट्रांसफर करने की शक्ति प्रदान करती है धारा 21 (A) से एक नया प्रोविजन है जो विवाह कानून संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा जोड़ा गया। धारा 21 (A) अनुसार कोर्ट को याचिकाएं दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर करने की शक्ति प्रदान की गई है ताकि अलग-अलग जगह पर दायर की गई याचिका और कैसे बचा जा सके। 

 

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 10 – Shruti Kaushal Vs Kaushal Bisht

 

Judicial Separation यानी न्यायिक पृथक्करण की बात करती है जब पति पत्नी को ऐसा लगता है कि वह साथ नहीं रह सकते तो धारा 10 के तहत Judicial separation के लिए जा सकते हैं। 

 

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13

 

तलाक की मांग का प्रोविशन करती है जिसमें उसके आधार बताए गए हैं। 



आज हम बात कर रहे हैं केस श्रुति कौशल बेस्ट बनाम कौशल आर बेस्ट केस की। इस केस में जस्टिस वी सुब्रमण्यम ने यह बात साफ कर दी की नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 25 (1) सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 21(A) नहीं छीनती।

क्योंकि इस मामले में पति और पत्नी तलाक लेना चाहते हैं। मगर यहां पति पुणे में रहता है और पत्नी दिल्ली में। पति ने तलाक की याचिका पुणे में दायर की और पत्नी ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए सेक्शन 9 के अंतर्गत याचिका को दिल्ली में दायर किया। फिर दोनों सुप्रीम कोर्ट पहुंचे ताकि दोनों इस मामले को अपने अपने शहर में ट्रांसफर करवा सके। पत्नी ने कहा कि उसके पास इनकम का कोई सोर्स नहीं है इसलिए याचिका को पुणे से दिल्ली में ट्रांसफर कर दिया जाए। पर पति ने कहा कि तलाक के लिए उसने पहले याचिका दाखिल की है इसलिए धारा 21 A (2 B ) के तहत पत्नी की याचिका को पुणे में ट्रांसफर किया जाना चाहिए। 

 

धारा 21(A) कहते हैं कि जब भी कोई Judicial Separation या तलाक की डिक्री के लिए प्रार्थना की जाती है और Clause B के अनुसार अगर याचिकाएं अलग-अलग शहरों में दायर की जाती है तो याचिका को उसके शहर में ट्रांसफर किया जाएगा जिसमें याचिका को पहले दायर किया था। 


कोर्ट ने कहा कि इस मामले में

 

कोर्ट ने कहा पति ने पहले याचिका दायर की थी जो कि तलाक की याचिका है तो पति का मामला धारा 21(A) सब सब सेक्शन (1 ए) में फिट बैठता है। लेकिन पत्नी की याचिका धारा 13 और धारा 10 के तहत दर्ज नहीं की गई बल्कि वैवाहिक रिश्ते की बहाली के लिए सेक्शन 9 के तहत दायर की गई थी। तो यहां पर याचिका किसने  पहले दायर की इस शर्तों को पूरा नहीं माना जाएगा। क्योंकि दोनों मामले अलग-अलग है इसलिए कोर्ट ने इस मामले में पत्नी की ट्रांसफर याचिका को स्वीकार कर लिया और पति की इस प्रस्ताव को कि वह पत्नी के आने जाने का खर्चा उठाएगा उस को खारिज कर दिया। 

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