Supreme Court Judgement – किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय या अनुशासनात्मक कार्यवाही निजी सूचना है क्या नहीं

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किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय या अनुशासनात्मक कार्यवाही निजी सूचना है क्या नहीं .

आज हम बात कर रहे हैं केस फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया बनाम सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमिश्नर एंड अनदर केस की।  इस केस में भारतीय खाद्य निगम ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी। उस फैसले में कहा गया था कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही या विभागीय कार्यवाही निजी सोचना नहीं है।  और भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ लोगों को पता चलना चाहिए।



इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था।

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निगम ने केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और हाई कोर्ट के सामने निगम ने गिरीश चंद्र गिरीश रामचंद्र देशपांडे वर्सेस केंद्रीय सूचना आयुक्त केस में दिए गए फैसले की दलील दी थी। इस फैसले में कहा गया था कि किसी व्यक्ति ने अपने आयकर रिटर्न में जो भी सूचना सार्वजनिक की है और आरटीआई एक्ट के क्लास (J) और धारा 8(1) के तहत निजी सोचना है। और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। चाहे आप लोगों को इसके बारे में जानना जरूरी ही क्यों ना हो।



लेकिन पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इस केस में याचिकाकर्ता के अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।  उसमें उसके खिलाफ विभागीय जांच पूरी हो चुकी है और अधिकारी को सजा भी सुना दी जा चुकी है।  और अब याचिकाकर्ता के पास ऐसी कौन सी सूचना है जो निजी है याचिकाकर्ता है उसके बारे में क्यों नहीं बता रहा है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक नोटिस जारी किया है।




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