Supreme Court Judgement on Handicap Pension – क्या किसी सेना के अधिकारी को घर का काम करते हुए चोट लगे तो विकलांगता पेंशन देनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – बहू को सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – बहू को सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार
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क्या किसी सेना के अधिकारी को घर का काम करते हुए चोट लगे तो विकलांगता पेंशन देनी चाहिए ? Secretary to the Government of India vs. Dharambir Singh

 

इस मामले पर फैसला सुनाया सुप्रीम कोर्ट ने :- इस मामले में माना कि विकलांगता पेंशन तभी स्वीकार की जा सकती है जब सेना के अधिकारी को चोट भी सैन्य सेवा करते हुए आए हो।

 

जस्टिस नागेश्वर राव और हेमंत गुप्ता की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की और सशस्त्र बल के गठन के फैसले को रद्द कर दिया  .

 

इस केस में घरेलू सामान खरीदने के लिए स्कूटर से जाती हुई दुर्घटना के शिकार हुए सेना के अधिकारी को विकलांगता पेंशन देने का आदेश दिया था। यह मामला है सचिव भारत सरकार वर्सेस धरमवीर सिंह का।

 

अधिकारी दुर्घटना के समय छुट्टियों पर था। एएफ़पी ने उसे विकलांगता पेंशन देने का आदेश दिया था। उसी के खिलाफ रक्षा मंत्रालय ने अपील दायर की थी जिसमें कहा गया है कि विकलांगता पेंशन केवल तब ही दी जा सकती है जब चोट सेना में काम करते हुए आई हो ।

 

किसी आसानी के गतिविधि के कारण आई चोट के कारण विकलांगता पेंशन नहीं दी जा सकती इसलिए यह दुर्घटना तब हुई जब अधिकारी घरेलू सामान खरीदने घर से निकला था।  इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि चोट का सेना से कोई लेना-देना था ।

 

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि चोट मृत्यु सशस्त्र सेना के कारण होने चाहिए ना कि दुर्घटना के कारण। जब कोई व्यक्ति घर का सामान लेने जा रहा होता है तो इसका दूर तक ही सेना से कोई लेना-देना नहीं होता।  और तब जब जब सेना का अधिकारी छुट्टी पर है।

 

साथ ही कोर्ट ने कहा कि एक सेना के अधिकारी की विकलांगता पेंशन तक दी जा सकती है जब उस पर हमला इसलिए किया गया हो क्योंकि वह एक सेना का अधिकारी है। इसी तरह एंटीटलमेंट रूल फॉर कैजुअल्टी पेंशनरी अवॉर्ड्स 1982 की बात करें तो नियम 12 के खंड एएफ कहता है कि एक दुर्घटना को सेना के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। भले ही एक आदमी ड्यूटी पर ना हो।

 

इसलिए अगर कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति द्वारा घायल किया जाएगा या मार दिया जाता है सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका संबंध सेना से है तो वह व्यक्ति ड्यूटी पर माना जाएगा और इस केस में ऐसा कोई संबंध दिखाई नहीं देता।

 

इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि विकलांगता पेंशन तभी दी जा सकती है जब सैन्य सेवा के कारण चोटे आई हो।

Secretary to the Government of India vs. Dharambir Singh



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