Widow Woman’s Right to Her Husband’s Property After Second Marriage | दूसरी शादी के बाद विधवा महिला का अपने पति की प्रोपर्टी मे अधिकार होगा या नही

मुस्लिम कानून के तहत पति की दूसरी शादी पहली पत्नी के खिलाफ क्रूरता - कर्नाटक हाईकोर्ट
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Property Rights of Widow in India- दूसरी शादी के बाद विधवा महिला का अपने पति की प्रोपर्टी मे अधिकार होगा या नही

 

क्या विधवाओं के पति की संपत्ति में अधिकार होते हैं? क्या होगा अगर उन्होंने दूसरी शादी कर ली? जब भी संपत्ति के मालिकाना हक की बात आती है तो ये सवाल बार-बार उठते हैं। आइए आपको इनके जवाब बताते हैं।

Property Rights of Widow in India पर क्या कहता है कानून ?

पहले जो कानून थे, उनके तहत दूसरी शादी करने वाली विधावाओं का अपने पति की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं था। विधवा पुनर्विवाह कानून, 1856 के तहत, ”अगर विधवा दूसरी शादी कर लेती है तो उसका मृत पति की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं रह जाएगा। मृतक के वारिसों का उस पर अधिकार माना जाएगा”। हालांकि इस कानून को निरस्त कर दिया गया है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत जो विधवा दूसरी शादी कर लेती है, उसका मृत पति की संपत्ति पर अधिकार नही है

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विधवा का अधिकार होता है: Property Rights of Widow in India

पिछले साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर विधवा दूसरी शादी कर भी लेती है, तब भी उसका मृत पति की संपत्ति पर अधिकार होगा। कोर्ट ने यह आदेश उस वक्त दिया, जब एक शख्स (मृतक के भाई) ने विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 के सेक्शन 2 का हवाला देते हुए कहा कि उसकी भाभी, जिसने दूसरी शादी की है, उसे मृतक की संपत्ति का वारिस होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

लेकिन हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि विधवा मृतक पति के क्लास-1 वारिसों में आती है, लिहाजा वह वारिस मानी जाएगी। पति के रिश्तेदारों को द्वितीय वारिसों में माना जाएगा। क्लास-1 वारिसों में बेटा, बेटी, मां, मर चुके बेटे का बेटा, मरे चुके बेटे की बेटी, मर चुकी बेटी का बेटा, मर चुकी बेटी की बेटी, मर चुके बेटे के मर चुके बेटे का बेटा, मर चुके बेटे के मर चुके बेटे की बेटी, मर चुके बेटे के मर चुके बेटे की विधवा शामिल हैं ।

ध्यान दें: Property Rights of Widow in India

*गोद लिए गए बेटे या बेटी को भी वारिस माना जाएगा। 
*निरर्थक और अमान्य शादियों से पैदा हुए बच्चे भी सेक्शन 16 के तहत वैध माने जाएंगे, साथ ही वारिस भी।
*अगर एक से ज्यादा विधवाएं हैं तो उन्हें अपने पति की संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा। एक विधवा मां को भी सेक्शन 14 के आधार पर अन्य वारिसों के साथ हिस्सा दिया जाएगा। यह आदेश जयलक्ष्मी बनाम गणेश अय्यर मामले में बरकरार रखा गया। अगर महिला तलाकशुदा हो या उसने फिर से शादी की है तो वह बेटे की संपत्ति में वारिस होगी। यहां मां शब्द में दत्तक मां भी शामिल है। अगर दत्तक मां है तो वसीयतनामा न होने की स्थिति में प्राकृतिक मां का संपत्ति में कोई अधिकार नहीं माना जाएगा। धारा 3 (आई) (जे) के आधार पर एक मां अपने नाजायज बेटे की संपत्ति की भी वारिस मानी जाएगी।

अपवाद

हालांकि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत कुछ विधवाओं को संपत्ति में अधिकार नहीं दिए जाते। ”दूसरी शादी करने वाली कुछ विधवाओं को वारिस नहीं  माना जाता। कोई वारिस जो मरने वाले के मर चुके बेटे या भाई की विधवा है, उन्हें संपत्ति में वारिस नहीं माना जाएगा”।  

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