पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद – आपसी सहमति से तलाक के नियम

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पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद -आपसी सहमति से तलाक के नियम

 विवाह विधि अधिनियम 1976 की धारा 13 (ख) के अनुसार इस अधिनियम के उपबंधुओं के अंतर्गत या दोनों पक्ष कार पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद की डिक्री  द्वारा विवाह के विघटन के लिए याचिका जिला न्यायालय में चाहे जिस विधि से हुआ हो , विवाह विधि संशोधन अधिनियम 1976 के प्रारंभ के पूर्व अनुष्ठापित किया गया हो, चाहे उसके पश्चात इस आधार पर पेश कर सकेंगे। कि वे 1 वर्ष या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं, और वे एक साथ नहीं रह सकते हैं , तथा वे इस शर्त के लिए पारस्पर सहमत हो गए हैं।,कि विवाह विघटित कर देना चाहिए।




      विवाह विधि अधिनियम 1976 की धारा 11 (ख) उपधारा एक में निर्दिष्ट याचिका के उपस्थिति तारीख से 6 माह के पश्चात और 18 माह के भीतर दोनों पक्षकारों द्वारा किए गए प्रस्ताव पर यदि इसी बीच याचिका वापस नहीं ले ली गई हो, तो न्यायालय पक्षकारों को सुनने के पश्चात और ऐसी जांच जैसी वह ठीक समझे। यह घोषणा करने के पश्चात और अपना यह समाधान कर लेने के पश्चात की विवाह अनुष्ठापित हुआ है, और याचिका में कहे गए कथन ठीक है , यह घोषणा करने वाले डिक्री पारित करेगा, कि विवाह डिक्री की तारीख में विघटित हो जाएगा।
       संशोधन अधिनियम 1976 के अंतर्गत धारा 13 (क) द्वारा जो परिवर्तन किया गया है, वह इस प्रकार है- ” यदि विवाह विच्छेद की याचिका दायर की गई है, तो धारा 13 के अधीन कई धर्म परिवर्तन संसार पर त्याग तथा प्रकल्पित मृत्यु के आधारों को छोड़कर यदि न्यायालय याचिका के   प्रकथन से संतुष्ट हैं, तो विवाह विच्छेदके स्थान पर न्यायिक पृथक्करण की डिक्री पारित कर सकता है। ।

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