High Court Judgement on IPC 306 | सुसाइड नोट में लगाए गए आरोप आईपीसी की धारा 306 के तहत केस बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने धारा 306 के तहत आरोपित एक अभियुक्त को अग्रिम जमानत देते हुए कहा है कि ”मृत्यु या सुसाइड नोट में लगाए गए आरोप कि याचिकाकर्ता और अन्य उसकी मौत के लिए जिम्मेदार हैं, इस निष्कर्ष पर आने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि याचिकाकर्ता ने अपराध किया है।

जब तक कि अभियोजन के मामले को साबित करने के लिए, अभियुक्त के उन कार्य व आचरण के बारे में जानकारी न दी जाए या ऐसा कुछ न बताया जाए, जो व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के लिए पर्याप्त था।”

यह था मामला (Judgement on IPC 306)

न्यायमूर्ति के.एन फनेन्द्र ने आरोपी नौशाद अहमद को अग्रिम जमानत देते हुए उसे जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि उसे 50,000 के निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया जाए।

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याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया है कि वह जांच में बाधा न पहुंचाए या सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करे। उसे यह भी कहा गया है कि वह जांच में सहयोग करे और पूर्व अनुमति के बिना जांच अधिकारी के अधिकार क्षेत्र को छोड़कर या उससे बाहर न जाए।

छावनी रेलवे पुलिस ने एक फैब्रिकेटर या जालसाज के आत्महत्या के मामले में अहमद को आरोपी नंबर 3 के रूप में पेश किया था। आरोप लगाया गया था कि शव की जांच करने पर, शिकायतकर्ता और पुलिस को एक नोटबुक का एक टुकड़ा मिला था, जिसमें मृतक ने लिखा था कि उसकी मौत के लिए याचिकाकर्ता और अन्य जिम्मेदार थे।

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यह भी पता चला है कि विभिन्न अपार्टमेंट में ग्रिल का काम करने के लिए मृतक को उसके जीवन काल के दौरान या मरने से पहले काफी पैसा दिया गया था।

अदालत ने कहा,

”मृतक के उक्त मृत्यु नोट पर विचार करने के बावजूद, पुलिस द्वारा आरोपी व्यक्तियों को आरोपित करने का कारण नहीं बताया गया है। वहीं मामले में लगाए गए आरोप बहुत अस्पष्ट है।”





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