Landlord Right to Evict Property – Supreme Court Judgement | मकान मालिक को खाली करने का अधिकार

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किराए के घर के एक हिस्से को किसी दूसरे को किराए पर देने से मकान मालिक पूरा घर खाली  करा सकता है- सुप्रीम कोर्ट का फैसला

 

Diary Number 27482-2008 Judgment
Case Number C.A. No.-002442-002443 – 2011 13-01-2020 (English)
Petitioner Name K.LUBNA
Respondent Name BEEVI
Petitioner’s Advocate K. RAJEEV
Respondent’s Advocate LIZ MATHEW
Bench HON’BLE MR. JUSTICE SANJAY KISHAN KAUL, HON’BLE MR. JUSTICE K.M. JOSEPH
Judgment By HON’BLE MR. JUSTICE SANJAY KISHAN KAUL

 

Landlord Right to Evict Property – Supreme Court Judgement:- सुप्रीम कोर्ट ने केरल बिल्डिंग (लीज एंड रेंट कंट्रोल), अधिनियम, 1965 ( Kerala Buildings (Lease and Rent Control), Act, 1965]) के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा है कि किराए के परिसर (property) या घर के किसी भी हिस्से को किसी अन्य को किराए पर देने से या उसे उप किराएदारी (Sub-Letting) में देने से मकान मालिक को पूरे परिसर (property) से किराएदार को बेदखल करने का अधिकार मिल जाता है।

 

क्या था मामला

मकान मालिक द्वारा इस मामले में दी गई दलील यह थी कि भले ही परिसर के एक हिस्से में उप-किरायेदारी की जाए, लेकिन निष्कासन या खाली कराने का अधिकार पूरे परिसर के संबंध में मिल जाता है। इस दलील का जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के.एम जोसेफ की बेंच ने एम. मीरामेथेन एंड अदर्स बनाम के.परमेस्वरन पिल्लई मामले में दिए फैसले का हवाला दिया, जो उनके अनुसार, इस मुद्दे के सभी पहलु को शामिल करता है।

 

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने इस मामले में कहा-

 

“उक्त अधिनियम ( Kerala Buildings (Lease and Rent Control), Act, 1965]) की धारा 11 की उप-धारा (4) के उप-पैरा ( i) को देखने से ये पता चलता है कि किरायेदार द्वारा अपने अधिकारों को पट्टे के तहत हस्तांतरित करने से और पूरी प्रॉपर्टी की उप-किराएदारी (Sub-letting) करने की अनुमति नहीं देता है तो इसी  बात को आधार बनाकर आवश्यक है कि मकान मालिक लीज की इस शर्त के उल्लंघन की सूचना देते हुए किरायेदार को एक रजिस्टर्ड नोटिस भेजे और इसके बाद किरायेदार नोटिस प्राप्त होने के तीस दिन के भीतर स्थानांतरण या sub -letting को समाप्त करने में असफल रहता है, तो मकान मालिक द्वारा किरायेदार को बेदखली के लिए एक आवेदन किया जा सकता है।

 

इस प्रकार, किराए के परिसर के किसी भी हिस्से की उप-किराएदारी करना या किराए पर देने से पूरे परिसर से बेदखली का अधिकार मिल जाता है।- Landlord Right to Evict Property – Supreme Court Judgement

 

इस तरह से यह कानून ( Kerala Buildings (Lease and Rent Control), Act, 1965]) बताता है  इसकी यह एक उचित व्याख्या है, जैसे, यदि एक उप-किरायेदारी बनाई जाती है, तो पूरे परिसर की बजाय केवल एक भाग के संबंध में बेदखली आदेश पारित करना उचित नहीं होगा।”

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने यह भी कहा कि, अगर परिसर के एक हिस्से में ही उप-किराएदारी की गई है, तो मकान मालिक से यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वह पूरे परिसर की उप-किराएदारी करने का आरोप लगाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अपीलकर्ताओं ने विशेष रूप से यह दावा नहीं किया है कि एक हिस्से की उप-किराएदारी से, पूरे परिसर को खाली करने के लिए उत्तरदायी है, लेकिन यह कानूनी परिणाम है जो कानूनी स्थिति से उभर रहा है। अपील की अनुमति देते हुए, सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा कि किराएदार ने परिसर के एक हिस्से की उप-किराएदारी की है, इस आधार पर मकान मालिक किराए पर दिए पूरे परिसर से बेदखली कराने की मांग का हकदार है।

 

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