IPC Section 331 in Hindi | Voluntarily Causing Grievous Hurt to Extort Confession – Dhara 331

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IPC Section 331 in Hindi | Voluntarily Causing Grievous Hurt to Extort Confession – Dhara 331

भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 330 एवं 331 की परिभाषा:-

धारा 330 IPC :- अगर कोई व्यक्ति किसी बात की स्वीकृति के लिए किसी अन्य व्यक्ति को डराता धमकाता हैं या सामान्य मारपीट करता है। या कोई अधिकारी किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कोई काम करने के लिए यातनाएं देता है एवं मजबूर करता है तब ऐसा करने वाला व्यक्ति धारा 330 के अंतर्गत दोषी होगा।

IPC धारा 331:- अगर कोई व्यक्ति अपनी या कोई अन्य स्वीकृति के लिए गम्भीर चोट पहुचाता हैं। या ऐसी यातनाएं देता है जिससे व्यक्ति की जान भी जा सके, या किसी काम करने के लिए मजबूर करता है तब वह व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दोषी होगा।




धारा 331 IPC का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 331 के अनुसार, जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकॄति या कोई जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए अथवा उपहत व्यक्ति या उससे हितबद्ध व्यक्ति को मजबूर किया जाए कि वह कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति प्रत्यावर्तित करे, या करवाए, या किसी दावे या मांग की पुष्टि करे, या ऐसी जानकारी दे, जिससे किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति का प्रत्यावर्तन कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।




Section 331 IPC – Voluntarily Causing Grievous Hurt to Extort Confession

Whoever voluntarily causes grievous hurt for the purpose of extorting from the sufferer or from any person interested in the sufferer any confession or any information which may lead to the detection of an offence or misconduct, or for the purpose of constraining the sufferer or any person interested in the sufferer to restore or to cause the restoration of any property or valuable security, or to satisfy any claim or demand or to give information which may lead to the restoration of any property or valuable security, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 330 एवं 331 में दण्ड का प्रावधान:-

1. धारा 330 का अपराध संज्ञेय एवं जमानतीय होता है।इनकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट करते हैं। सजा- सात वर्ष की कारावास और जुर्माना से दण्डित किया जाएगा।

2. धारा 331 के अपराध संज्ञेय एवं अजमानतीय होते हैं, इनकी सुनवाई सेशन न्यायालय में होती हैं। सजा- 10 वर्ष की कारावास एवं जुर्माना।




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