मकान या दुकान किरायेदार से खाली कैसे कराएं | How to Evict Tenant from Property

मकान या दुकान किरायेदार से खाली कैसे कराएं | How to Evict Tenant from Property
मकान या दुकान किरायेदार से खाली कैसे कराएं | How to Evict Tenant from Property
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मकान या दुकान किरायेदार से खाली कैसे कराएं | How to Evict Tenant from Property

हेलो फ्रेंड्स आज हम बात करने वाले हैं भारत की सबसे कॉमन प्रॉब्लम किराएदार और मकान मालिक के डिस्प्यूट के बारे में||| भारत में जितने ज्यादा मकान मालिक हैं उससे कहीं ज्यादा किराएदार है तो ऐसे मैं उनके बीच डिस्प्यूट होना बड़ी कॉमन सी बात है । हाल फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर कई अहम फैसले दिए । और 26-09-2019 को इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया था जिसका नाम था कृष्णा मूर्ति सेतलर बनाम नरसिम्हा सेठी । कोर्ट का कहना था कि अगर कोई व्यक्ति 12 सालों तक किसी प्रॉपर्टी पर बिना रोक-टोक रह लेता है तो वह प्रॉपर्टी उस प्रॉपर्टी का मालिक बन जाता है ।

मकान किरायेदार से खाली कैसे कराएं

 लिमिटेशन एक्ट 1963 का कानून भी प्रतिकूल कब्जे के बारे में विस्तार से बात करता है इस कानून में प्राइवेट प्रॉपर्टी के लिए 12 साल और सरकारी प्रॉपर्टी के लिए 30 साल का समय बताया गया है जिसके बाद कोई व्यक्ति उस प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक प्राप्त कर लेता है । लिमिटेशन एक्ट एक समय के बाद मकान मालिक के अधिकार पर रोक लगा देता है । अगर टाइम रहते मकान मालिक कोई एक्शन नहीं लेता चाहे कितना भी उसके पास प्रॉपर्टी के टाइटल के पेपर हो प्रॉपर्टी उसकी नहीं रहेगी ।




इसी तरह रविंदर सिंह ग्रेवाल बनाम मनजीत कौर के केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रॉपर्टी पर जिसका कब्जा है उसे कोई दूसरा व्यक्ति बिना किसी कानूनी प्रोसेस के नहीं हटा सकता चाहे वह उसका मालिक ही क्यों ना हो ।अगर आपने अपना मकान या दुकान किराए पर दिया हुआ है तो खाली किस तरह से करवाना चाहिए या फिर किराए पर देते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए ।

 

अक्सर देखा जाता है कि मकान मालिक की जरा सी असावधानी बाद मे बहुत भारी पड़ जाती है जब किराएदार घर या दुकान खाली करने से मना कर देता है । कई बार तो ऐसा होता है कि मकान मालिक को खुद किराएदार को ही पैसे देने पड़ते हैं ताकि वह आराम से घर खाली कर दे । अगर नहीं निकलते तो कई बार मकान या दुकान को बहुत सस्ते दामों पर बेचना भी पड़ सकता है ।

 

 तो सवाल यह है कि किराए की प्रॉपर्टी को किस तरह से बचाया जाए कौन कौन सी सावधानियां बरती जा सकती हैं ।




1- कंपनी को किराये पर पहले दे

 

किसी भी प्रॉपर्टी को दो तरीके से किराए पर दिया जाता है । या तो किसी व्यक्ति विशेष को या फिर किसी कंपनी को अगर आपके पास दोनों ऑप्शन है तो आपका पहला ऑप्शन कंपनी का ही होना चाहिए । यानी कि आपको कंपनी को ही प्रॉपर्टी को किराए पर देना चाहिए । क्योंकि कंपनी कभी कब्जा करने का नहीं सोचते । लेकिन व्यक्ति ही प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लेते हैं ।

 

 कंपनी को चाहे थोड़े कम पैसे ही पर ही प्रॉपर्टी को किराए पर देना पड़े आपको कंपनी को ही choose करना चाहिए । क्योंकि कंपनी लॉ एक्ट के अनुसार कंपनी लॉ बोर्ड के कुछ अपने नियम होते हैं । जिनका उल्लंघन करने पर उसे भारी जुर्माना भी देना पड़ सकता है । तो कंपनी ऐसे केसो में पढ़ने से हमेशा बचती है और किराया टाइम से भी देती है ।




2- प्रॉपर्टी को किराए पर देने से पहले उसकी फोटो जरूर ले

 

अपनी प्रॉपर्टी को किराए पर देने से पहले उसकी फोटो जरूर ले ले । और उन सब फोटोस पर अपने किराएदार के सिग्नेचर पर ले ले । ताकि अगर कभी प्रॉपर्टी का कोई नुकसान भी पहुंचता है तो आप उसकी भरपाई कोर्ट में इसके थ्रू करवा सकते हैं ।

3- 11 महीने का ही  एग्रीमेंट होना चाहिए

 

11 महीने का ही एग्रीमेंट होना चाहिए – किसी भी व्यक्ति को मकान किराए पर देने से पहले 11 महीने का एग्रीमेंट होना चाहिए । उसके बाद आप नया एग्रीमेंट बनवा सकते हैं । लेकिन कंपनी को प्रॉपर्टी दे रहे हैं तो आप चाहे कितने भी समय का एग्रीमेंट कर सकते हैं ।




एग्रीमेंट 11 महीने का बनाने के पीछे कारण यह होता है कि कोई भी पक्का एग्रीमेंट 12 महीने या ज्यादा समय का होता है । उसे लोकल रजिस्ट्रार के ऑफिस में जाकर रजिस्टर कराना होता है । इसके पीछे काफी खर्चा भी आता है जिससे बचने के लिए लोग 11 महीने का एग्रीमेंट बनवा लेते हैं । अगर कोर्ट में किराएदार स्टे लेने जाता है तो रीजन यह बताता है कि उसका प्रॉपर्टी से निजी लगाव जुड़ा हुआ है तथा आर्थिक हित भी जुड़े हुए हैं । अगर उसने खाली किया तो उसे बहुत ही ज्यादा नुकसान होगा आर्थिक हानि हो जाएगी ।

मकान किरायेदार से खाली कैसे कराएं

 लेकिन 11 महीने का एग्रीमेट होने से मकान मालिक यह कह सकता है कि उसने यह मकान सिर्फ 11 महीने के लिए किराए पर दिया था । इतने छोटे समय के लिए किसी का कोई लगाव नहीं हो सकता और किराएदार को मकान खाली करने में कोई हानि नहीं होगी ना ही सरकार को इस प्रॉपर्टी से कोई टैक्स मिलता है ना ही कोई लाभ होता है । तो इससे किराएदार को स्टे नहीं मिल पाएगा और केस मकान मालिक के हक में चला जाएगा ।




4- 11 महीने के बाद दूसरे नाम से एग्रीमेंट बनाये (मकान किरायेदार से खाली कैसे कराएं)

 

एक उपाय और है कि 11 महीने के बाद आप अगर उसी व्यक्ति को मकान किराए पर देना चाहते हैं तो आप उसी परिवार के दूसरे मेंबर के साथ एग्रीमेंट बनाए । क्योंकि कोर्ट में केस होने पर आप कह सकते हैं कि हर बार अलग-अलग इंसान के साथ एग्रीमेंट बनाया गया था । पर अगर वह व्यक्ति अपने ही नाम से एग्रीमेंट बनवाना चाहता है तो जैसे ही 11 महीने खत्म हो जाए तो आप कुछ महीने रुकने के बाद दूसरा नया एग्रीमेंट बनाए । और इस बीच जितने भी किराए के स्लिप हो किराएदार को ना दें । तो अगर कभी कोई डिस्प्यूट होता भी है तो आप कह सकते हैं कि किराएदार कई सालों से प्रॉपर्टी पर रह रहा था । पर लगातार वह कभी भी इस प्रॉपर्टी पर नहीं रहा । क्योंकि वह वह आता जाता रहा था ।




5- रेंट एग्रीमेंट ही ना बनाएं

 

यह पॉइंट सुनने में अजीब लगता है पर हो सके तो आप एग्रीमेंट ही ना बनाएं । बिना एग्रीमेंट के किराएदार कोर्ट में जाने से परेशानी में पड़ सकता है । कोर्ट में किराए का कोई प्रूफ भी नहीं देगा । अगर किराएदार टाइम से किराया ना दे तो मकान मालिक का ही फायदा है । वह कह सकता है कि किराएदार किराया नहीं देता या टाइम से नहीं देता इसलिए मकान खाली कराना है ।

 

पर इसका एक नुकसान यह है कि अगर बिना एग्रीमेंट के किराएदार को मकान में रखा तो वह अपनी सारी आईडी उसी एड्रेस पर बनवा लेता है । और आपको परेशान भी कर सकता है । ऐसे में आपको ज्यादा समय के लिए किराएदार नहीं रखना चाहिए और समय रहते किराएदार को बदल देना चाहिए ।




6- किरायेदार की बिजली और पानी न काटे

 

बिजली और पानी जीवन जीने का आधार है । और यह अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 में दिया गया है । मकान मालिक को कभी भी किसी किराएदार की बिजली और पानी को नहीं काटना चाहिए । क्योंकि यह बेसिक जरूरतें होती हैं इसके बिना कोई भी कहीं रह नहीं सकता । बड़ा ही मुश्किल होता है ऐसे में अगर किराएदार कोर्ट चला गया तो कोर्ट सबसे पहले वाटर सप्लाई और इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को किराएदार के नाम से एक नया मीटर लगाने का ऑर्डर दे देगी और यह आपके फेवर में नहीं होगा ।

 

7- किराएदार से कभी झगड़ा नहीं करना चाहिए

 

किराएदार से कभी झगड़ा नहीं करना चाहिए । किराएदार को ना ही डराना धमकाना चाहिएन ही उनका कोई भी सामन घर से बहार फेकना चाहिए। कोशिश यही करनी चाहिए कि प्यार से बात बन जाए ।




8-  किराये के लिए एक रसीद बुक रखे

 

मकान मालिक को चाहिए के किराए की एक रसीद बुक रखे हैं । शुरुआत में रसीद किराएदार को देनी चाहिए और उसके बाद नहीं देनी चाहिए । क्योंकि अगर कोर्ट में केस जाता है तो मकान मालिक रसीद बुक दिखा कर यह प्रूफ कर सकता है कि किराएदार ने कुछ समय तक तो किराया दिया था पर बाद में उसने किराया देना बंद कर दिया । इससे केस मकान मालिक के हाथ में चला जाता है ।

9- किराया हमेशा नगद में ले




किराया हमेशा नगद में ले अगर आप अपने खाते में किराया लेते हैं या चेक से पेमेंट लेते हैं तो यह आपके हित में अच्छा नहीं है क्योंकि किराएदार यह प्रूफ कर देगा कि वह किराया समय से देता था ।

 

10- किसी भी व्यक्ति को किराए पर मकान देने से पहले उसकी हिस्ट्री जरूर निकाल ले

 

किसी भी व्यक्ति को किराए पर मकान देने से पहले उसकी हिस्ट्री जरूर निकाल ले । वह पहले कहां रहता था कितने साल रहा, वहां से क्यों खाली करना पड़ा । और जरूरत पड़े तो पिछले मकान मालिक से भी मिले और पास के पुलिस स्टेशन में जाकर इसकी जानकारी अवश्य दें । यानि कि पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएं यह वेरीफिकेशन फ्री में किया जाता है जिसके लिए आपको किराएदार का पूरा ब्यौरा और उसका पिछला पता देना होता है ।




11- प्रॉपर्टी खली करने से पहले नोटिस दे

 

किराएदार से मकान खाली कराने से पहले 1 महीने का नोटिस जरूर दें । किराएदार के सामने हमेशा डटकर खड़े रहना चाहिए । अपने आप को कभी भी कमजोर नहीं दिखाना चाहिए । कोर्ट केस चलता है तब तक के लिए किराया कोर्ट के अपने पास रख लेता है । और मामला शांत होने पर वही किराया मकान मालिक को दे दिया जाता है । तो इस तरह के केस बहुत ज्यादा लंबे भी चल सकते हैं।




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