सुप्रीम कोर्ट का फैसला डॉक्टर की लापरवाही के लिए अस्पताल भी जिम्‍मेदार | Supreme Court Judgement on Medical Negligence

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Supreme Court Judgement on Medical Negligence:- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डॉक्टरो द्वारा ईलाज में बरती गई लापरवाही के लिए अस्पताल भी स्पष्ट रूप से जिम्मेदार है। जस्टिस उदय उमेश ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने एनसीडीआरसी के आदेश को बरकरार रखते हुए, जिसमें डॉक्टरों द्वारा ईलाज में बरती गई लापरवाही के लिए अस्पताल को स्पष्ट रूप से जिम्मेदार माना गया था, ये टिप्‍पणी की।

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मामले में डॉक्टरों ने कथित रूप से एक प्री-टर्म बेबी के रेटिनोपैथी की अनिवार्य नहीं की, जिसके कारण वो अंधा हो गया। (महाराजा अग्रसेन अस्पताल बनाम मास्टर ऋषभ शर्मा) चिकित्सा लापरवाही पर बोलम टेस्ट और अन्य फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रीमैच्योर बेबी की देखभाल के लिए बने उचित मानक के मुताबिक आरओपी की जांच अनिवार्य है:

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कोर्ट ने कहा: एक चिकित्सा पेशेवर को किसी भी पेशेवर कार्य में खतरों और जोखिमों के प्रति इस हद तक सतर्क होना चाहिए कि पेशे के अन्य सक्षम सदस्य सतर्क रहें। उसे किसी भी पेशेवर कार्य में, जिसे वो कर रहा है, उचित कौशल के साथ करना चाहिए, जिसे पेशे के दूसरे सक्षम सदस्य भी अपना सकें।” एनसीडीआरसी की जांच को बरकरार रखते हुए बेंच ने लड़के और उसकी मां को 76,00,000 रुपए का मुआवजा दिया और राशि के उपयोग का निर्देश भी जारी किया।

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कोर्ट ने आगे कहा: “यह सामान्य अनुभव है कि जब भी कोई मरीज किसी अस्पताल में जाता हैतो वह अस्पताल की प्रतिष्ठा के आधार पर वहां जाता है, और इस उम्मीद के साथ कि अस्पताल के अधिकारियों द्वारा उचित देखभाल की जाएगी। यदि अस्पताल अपने डॉक्टरों के माध्यम से, जो नौकरी या अनुबंध के आधार पर नियुक्त किए गए होते हैं, अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहता है तो हैं, यह अस्पताल है जिसे अपने डॉक्टरों की ओर से की गई चूक की सफाई देनी पड़ती है।”

 

कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही पर कहाः मेडिकल लापरवाही में निम्नलिखित कृत्य शामिल हैं:

(1) चिकित्सा पेशेवर द्वारा उचित देखभाल करने का कानूनी कर्तव्य;

(2) इलाज में शामिल जोखिमों के बारे में रोगी को न बता पाना;

(3) रोगी को चिकित्सा पेशेवर द्वारा अज्ञात जोखिम बारे में जानकारी न देने पर क्षति होती है;

(4) यदि जोखिम का खुलासा किया गया होता तो मरीज चोट से बचा जाता;

(5) उक्त कर्तव्यों का उल्लंघन लापरवाही की कार्रवाई के दावे को जन्म देगा।

 

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क्षति के लिए कार्रवाई का कारण केवल तब पैदा होता है, जब क्षति होती है, क्योंकि क्षति यातना का एक आवश्यक घटक है। चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायत में, कर्तव्य का उल्लंघन, चोट और कारण साबित करने की जिम्‍मेदारी शिकायतकर्ता पर होती है। चोट को चिकित्साकर्मी के कर्तव्य के उल्लंघन का साबित करने के लिए पर्याप्त हो। कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही के कानून के विकास का भी उल्‍लेख किया। अरुण कुमार मांगलिक बनाम चिरायु हेल्थ एंड मेडिकेयर (पी) लिमिटेड के मामले का उल्‍लेख करते हुए यह कहा गया कि बोलम (सुप्रा) में दी जाने वाली देखभाल का मानक अंग्रेजी और भारतीय अदालतों द्वारा अपनाई गई व्याख्या के अनुरूप होना चाहिए।

 





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