Supreme Court Judgement on SC ST Act | Hitesh Verma vs The State of Uttrakhand and Anr

Supreme Court Judgement on SC ST Act | Hitesh Verma vs The State of Uttrakhand and Anr
Supreme Court Judgement on SC ST Act | Hitesh Verma vs The State of Uttrakhand and Anr
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Supreme Court Judgement on SC ST Act | Hitesh Verma vs The State of Uttrakhand and Anr

 

सुप्रीम कोर्ट का एक लेटेस्ट जजमेंट आया है एससी एसटी एक्ट के ऊपर जिसमें उन्होंने यह समझाया कि एससी एसटी एक्ट के तहत इस कब अपराध माना जाएगा और कब नहीं।

 

क्या किसी अनुसूचित जाति जनजाति के व्यक्ति को घर के अंदर गाली देना अपराध होता है ? आज हम इसी बारे में बात करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का एक लेटेस्ट जजमेंट है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम किसी पर कब लगाई जा सकती है। बात हो रही है केस हितेश वर्मा बनाम द स्टेट ऑफ उत्तराखंड एंड अनदर केस  की।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति को घर की चारदीवारी के अंदर कितनी इमारत के अंदर प्रताड़ित किया जाएगा। धनखेती जाएंगे तो या अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम 1989 के तहत अपराध नहीं होगा। इस मामले में एक FIR दर्ज की गई थी जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि आरोपी पीड़ित के घर में गया उसे गालियां दी धमकाया और उसे जाति को लेकर अपशब्द कहे गए।




इस केस की सुनवाई तीन जजों की पीठ ने किया जिसमें जस्टिस एल नागेश्वरराव जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस अजय रस्तोगी  शामिल थे।

कोर्ट ने कहा कि एससी एसटी एक्ट की धारा 3 (1) R के तहत अपराध होने के लिए कुछ बातों को पूरा होना जरूरी होता है।

  1. अनुसूचित जाति जनजाति के व्यक्ति को जानबूझकर अपमानित किया जाए या धमकाया जाए।
  2. ऐसा अपमान किसी पब्लिक प्लेस पर होना जरूरी है।




कोट ने यहां फेमस केस  स्वर्ण सिंह व अन्य बनाम राज्य केस का हवाला दिया। इसमें यह कहा गया था कि अगर अपराध ईमारत के बाहर किया जाता है जहां देखने वाले दूसरे लोग भी होते हैं तो यह अपराध होता है।  लेकिन ऐसा काम घर के अंदर चारदीवारी के अंदर किया जाता है जहां आम लोग मौजूद नहीं होते तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।  एफ आई आर के अनुसार गाली देने का आरोप घर की चारदीवारी में हुआ है।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ इस बात का अपराध स्थापित नहीं किया जा सकता कि सूचना देने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का है। किसी व्यक्ति का अपमान या धमकी इस धारा के तहत तब तक अपराध नहीं है जब तक कि ऐसा अपमान या धमकी उसकी जाति को लेकर ना किया गया हो।







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