Explain Legal Authority as an Exception | कानूनी प्राधिकार को अपवाद के रूप में समझाइए

Spread the love
Explain Legal Authority as an Exception | कानूनी प्राधिकार को अपवाद के रूप में समझाइए:- जब किसी कानूनी या रीति-रिवाजों द्वारा मान्य कार्य किया जाता है। तब यदि किसी को कोई क्षति होती है। तो उसके आधार पर वाद का कारण नहीं बनता है और ना क्षतिग्रस्त व्यक्ति को नुकसानी ही मिलती हैं। ऐसे मामलों में यदि संबंधित अधिनियम में नुकसानी के लिए कोई उपबन्ध है, तो क्षतिग्रस्त व्यक्ति को नुकसान ही मिलेगी,। कानून ऐसे मामले में केवल उस कार्य तक ही लागू नहीं होता, वरन् उस से निकलने वाले परिणामों पर भी असर डालता है। कानून के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का  सतर्कता से उपयोग होना चाहिए। अन्यथा दायित्व से मुक्ति नहीं होंगी। ।




 मेट्रोपॉलिटन एसाइलम डिस्ट्रिक्ट बोर्ड बनाम हिल

इस मामले में एक स्थानीय प्राधिकारी को अधिनियम द्वारा यहां प्राधिकार प्राप्त हुआ था। कि वह चेचक अस्पताल निर्मित करने से इसीलिए रोक दिया गया। क्योंकि जो स्थान उस उद्देश्य के लिए चुना गया था। वहां चेचक का अस्पताल बनाना आसपास के रहने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य के लिए घातक था। न्यायालय ने यह मत व्यक्त किया, कि प्राधिकारी को कानून द्वारा अस्पताल बनवाने के प्राधिकारी प्रदत किया गया, यह सत्य है।  किंतु इस प्राधिकारी का प्रयोग इस प्रकार किया जाना लक्षित था, कि किसी को ऐसे कार्य से क्षति न पहुंचे।

कानून से मान्यता प्राप्त कार्यों को करने के परिणाम स्वरूप हुए क्षतियो के लिए कोई दायी नहीं होता । (Explain Legal Authority as an Exception)




       इस संबंध में बॉम्बे बड़ौदा एंड सेंट्रल इंडिया रेलवे बनाम द्वारकानाथ एक प्रसिद्ध भारतीय निर्णय हैं। रेल की पटरी तथा रेलवे भूमि की सीमा के भीतर करीब 2 फीट ऊंची घास उगी हुई थी, जो सूख गई थी। उसकी पास वादी की भूमि में सूखी घास थी। रेल के इंजन से निकलने वाली चिंगारी से पटरी के पास हुई घास में आग लग गई। परिणाम स्वरूप वादी खेत की घास जल गई। वादी ने रेलवे कंपनी पर क्षतिपूर्ति के लिए दावा किया। निर्णय किया गया कि  निः संदेह कंपनी ने इस बात में असावधानी बरती की पटरी के पास सूखी घास खड़ी रहने दी परंतु वादी भी कम सावधान नहीं था, क्योंकि उसने भी अपनी सूखी घास को खेत से नहीं काटा जबकि संभवत खतरे का उसे ज्ञान था। अतः वादी किसी नुकसानी का हकदार नहीं है।

Read More:-




एटार्नी जनरल बनाम नाटिंघम कारपोरेशन (Explain Legal Authority as an Exception)

 इस बाद में एक नगर निगम ने एक नगर के एक भाग में एक अस्पताल निर्मित करने का फैसला किया था। निगम के विरुद्ध इस आधार पर वाद दायर किया गया, कि हवा से बीमारी फैलने की संभावना थी। जिससे कि प्रस्तावित अस्पताल में उनके पड़ोसी के निवासियों को क्षति पहुंच सकती थी। वादी ने यह प्रार्थना की कि आदेश जारी करके उन्हें अस्पताल स्थापित करने से रोक दिया जाए। न्यायालय ने यह आदेश जारी करने से इंकार कर दिया, क्योंकि चेचक की बीमारी के हवा द्वारा फैलने के सिद्धांत को न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया।

के०आर० शीशों बनाम उदोपी म्युनिसिपेलिटी

 

इस विषय पर एक महत्वपूर्ण वाद है। इस मामले  के तथ्यों के अनुसार एक सिनेमाघर का निर्माण एक आवाज क्षेत्र में किया गया था। जिससे उस क्षेत्र के निवासियों के संपत्ति संबंधी अधिकार पर अवैध रूप से हस्तक्षेप हो रहा था। मैं म्युनिसिपैलिटी का यह बात देकर कर्तव्य था। कि वह अवैध भवन निर्माण से उस क्षेत्र के व्यक्तियों के सुख एवं अधिकार पर हस्तक्षेप किए जाने से रोके। किंतु यदि म्युनिसिपैलिटी अपनी शक्तियों का प्रयोग अधिनियम में दिए गए, अधिकारों से परे करते हैं ।  तो वह गलत होगा। यदि म्युनिसिपैलिटी मनमाने ढंग से आदेश पर करके सिनेमा भवन को ध्वस्त करने की कार्यवाही करती है। तो वह गलत होगा, और न्यायालय से आदेश को निरस्त कर देगा । यह ध्यान देने योग्य है, कि यदि अधिनियम द्वारा प्रदत्त अधिकार पूर्ण तथा आप जानते तो है, तो उसके प्रयोग में हुई क्षति अनुयोज्य नहीं होती। परंतु यदि अधिनियम कुछ कार्यों को करने का अधिकार कुछ शर्तों के पालन करने के आदेश के साथ देता है। तो उन शर्तों का पालन किया जाना आवश्यक होता।   शर्तों की अवहेलना से हुई क्षति अनुयोज्य यही अत्यंतिक प्राधिकार एवं सशक्त प्राधिकार में अंतर है।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *