Elections of Deputy Chairman and Deputy Speaker of Rajya Sabha and Lok Sabha || राज्यसभा तथा लोकसभा के उपसभापति तथा डिप्टी स्पीकर के चुनाव

Elections of Deputy Chairman and Deputy Speaker of Rajya Sabha and Lok Sabha || राज्यसभा तथा लोकसभा के उपसभापति तथा डिप्टी स्पीकर के चुनाव
Elections of Deputy Chairman and Deputy Speaker of Rajya Sabha and Lok Sabha || राज्यसभा तथा लोकसभा के उपसभापति तथा डिप्टी स्पीकर के चुनाव
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प्रश्न – . राज्यसभा तथा लोकसभा के उपसभापति एवं अध्यक्ष तथा डिप्टी स्पीकर के चुनाव के तरीकों के बारे में बतलाइए  || Elections of Deputy Chairman and Deputy Speaker of Rajya Sabha and Lok Sabha

राज्यसभा तथा लोकसभा सदनों का गठन –  राज्यसभा की रचना 

राज्यसभा के 250 सदस्य होते हैं | इनमें से 238 सदस्य राज्य और संघ क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं , और 12 ऐसे सदस्य होते हैं।  जो राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं, यह सदस्य साहित्य कला, विज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान तथा वास्तविक अनुभव रखते हैं।   नामांकित सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन के भाग नहीं लेते हैं, राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन सदस्य राज्य की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है , राज्यसभा के लिए संघ राज्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि ऐसी नीति से चुने जाएंगे जैसा कि संसद विधि द्वारा निर्धारित करें |
        राज्यसभा एक स्थाई सदन है , जो कि भंग नहीं होता है, परंतु इसके एक तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष की समाप्ति पर निवृत हो जाते हैं।  इस प्रकार एक सदस्य 6 वर्ष तक राज्य सभा सदस्य बना रहता है |
भारत का उप राष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, राज्यसभा यथासंभव शीघ्र अपने किसी सदस्य को उपसभापति चुनती हैं जब सभापति का पद रिक्त हो जाता है , तथा ऐसे किसी समय में जबकि उप राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति का कार्य कर रहा हो तो उपराष्ट्रपति उस पद के कर्तव्यों का पालन करेगा, यदि किसी कारणवश उपसभापति का पद भी रिक्त हो जाए तो राज्यसभा का ऐसा सदस्य कार्य करेगा जिसे राष्ट्रपति नियुक्त करें।

              लोकसभा की रचना

 लोकसभा मतदाताओं की सभा है।  इसके सदस्यों का चुनाव मतदाताओं के द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा किया जाता है। इसके सदस्यों की संख्या 550 है, जिसमें से 530 से अधिक सदस्य राज्यों के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाते हैं , तथा 20 सदस्य केंद्र शासित राज्यों के क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।  2 ऐग्लों  इंडियन के सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।   राज्यों के प्रतिनिधियों का चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष मतदान द्वारा होता है।
अर्थात भारत का प्रत्येक नागरिक को चाहे स्त्री हो या पुरुष जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, जो निवास क्षेत्र विकृत किया किसी अपराध व भ्रष्टाचार के आधार पर  अनर्ह नहीं कर दिया गया है, लोकसभा के सदस्यों का चुनाव में मतदान करने का अधिकारी है।

                राज्यसभा तथा लोकसभा:-  लोकसभा की अवधि

 लोकसभा यदि उससे पूर्व ना विघटित कर दी जाए तो अपने प्रथम अधिवेशन की तारीख से 5 वर्ष तक चालू रहेगी, राष्ट्रपति उस अवधि से पहले भी इसे व्यतीत कर सकता है |  परंतु उस कालावधि में जबकि आप आज उद्घोषणा प्रवर्तन में है , संसद विधि द्वारा 1 वर्ष के लिए बढ़ा सकती है|  इस प्रकार बढ़ाई गई अवधि किसी अवस्था में भी आपात उद्घोषणा के अंत हो जाने के बाद 6 महीने से अधिक ना होगी।




         आहूत सत्रावसान तथा विघटन

 राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदस्य को ऐसे समय और स्थान पर जैसा कि वह उचित समझता है , अधिवेशन के लिए बुलाता है |उसके लिए शर्त यह है, कि एक सत्र की अंतिम बैठक और आगामी बैठक के लिए नियुक्त तारीख के बीच 6 महीने का अंतर नहीं होना चाहिए , इस प्रकार राष्ट्रपति वर्ष में दो बार संसद का अधिवेशन बुलाता है |
            राष्ट्रपति समय-समय पर सदन का सत्रावसान कर सकता है 17 साल से हमारा अभिप्राय है, संसद के किसी विशेष सत्र को समाप्त करना होता है |लोकसभा को विकसित करने की शक्ति राष्ट्रपति में नहीं  है वह प्रधानमंत्री की सलाह पर लोकसभा को भंग कर सकता है |

            संसद के सदस्यों की योग्यता

 किसी व्यक्ति में संसद का सदस्य होने के लिए निम्नलिखित योग्यताओं का होना जरूरी है –
(क)   वह भारत का नागरिक हो।




(ख)   राज्यसभा के सदस्यों के लिए कम से कम 30 वर्ष की आयु का तथा लोकसभा के सदस्य के लिए कम से कम 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
(ग)   निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष तृतीय अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिए हुए प्रपत्र के अनुसार शपथ ले लिया हो।
(घ)   ऐसी योग्यताएं रखता हो, जो इस संबंध में संसद निर्मित किसी विधि के द्वारा निश्चित की गई हो उदाहरण के लिए लोकप्रतिनिधी अधिनियम के अनुसार व्यक्ति का नाम किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के रूप में पंजीकृत होना चाहिए।




         संसद को कानून द्वारा घोषित करने की शक्ति प्राप्त है, कि वह विशिष्ट पर संसद की सदस्यता के लिए अनर्ह  नहीं है।

         एक साथ दो सदनों की सहायता वर्जित है

 यदि कोई भी व्यक्ति बिना स्वीकृत शपथ ग्रहण के या अपनी योग्यता की जानकारी रखते हुए या योग्यता के अभाव के संसद के किस सदन में बैठता है, और मतदान करता है, तो वह प्रतिदिन पांच सौ प्रतिशत जुर्माना देने के लिए बाध्य होगा |




                सदस्यता की समाप्ति

 निम्नलिखित दशाओं में एक व्यक्ति संसद का सदस्य ना रहेगा।
(1)   यदि वह अनुच्छेद 102 (1)   में प्रतियोगिताओं के आधीन हो जाता है।
(2)   यदि वह स्पीकर को अपने हस्ताक्षर के लिए लिखित त्यागपत्र दे देता है, तो उसका स्थान रिक्त हो जाता है।
(3)   यदि संसद के किसी सदन का सदस्य बिना आज्ञा के 70 दिन तक सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लेता है, और  अनुपस्थिति रहता है |  तो ऐसी दशा में उनका स्थान रिक्त मान लिया जाएगा।
किंतु इस अवधि की गणना में उस समय को सम्मिलित नहीं किया जाएगा, जिसमें सदन लगातार 4 दिन से अधिक बंद रहे।



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