Difference Between Abduction and Kidnapping in Hindi | अपहरण एवं व्यपहरण के बीच अंतर

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Difference Between Abduction and Kidnapping in Hindi | अपहरण एवं व्यपहरण के बीच अंतर
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Difference Between Abduction and Kidnapping in Hindi | अपहरण एवं व्यपहरण के बीच अंतर

 

Abduction and Kidnapping :- महिलाओं एवं बच्चों का अपहरण एवं व्यपहरण एक सामान्य बात हो चुकी है। महिलाओं का अपहरण सामान्यत: विवाह एवं मैथुन के लिये किया जाता है। भिक्षावृत्ति आदि के लिये तो बालकों का अपहरण सामान्यत: किया जाता है। आजकल मुक्तिधन जिसे फिरौती कहते हैं के लिये अपहरण किया जाना सामान्य बात हो गयी है यह अपहरण का एक नवीन प्रकार है। इसे ‘फिरौती हेतु व्यपहरण’ (Abduction and Kidnapping) कहा जाता है। इसके लिये अवयस्क बालकों के अपहरण की तो बाढ़ सी आ गयी है।

 

अभिभावकों के संरक्षण में से बालक/बालिकाओं का अपहरण किया जाना तो सामान्य घटना बन चुकी है। इस प्रकार की घटनाओं में निरन्तर अभिवृद्धि हो रही है। इस प्रकार अपराध को रोकने हेतु भारतीय दण्ड संहिता में व्यापक प्रावधान किये गये हैं। भारतीय दण्ड संहिता की IPC धारा 359 से 369 IPC में इस संदर्भ में व्यापक उपबन्ध किया गया है। इसमें अपहरण एवं व्यवहरण की निम्न विधियां बतायी गयी हैं-

i) भारत में से व्यपहरण (IPC धारा 360)
ii) विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण (IPC धारा 361)
ii) भीख मांगने के प्रयोजनों के लिये अप्राप्तवय का व्यपहरण (IPC धारा 363-क)
iv) हत्या के लिये व्यपहरण या अपहरण (IPC धारा 364)
v) मुक्ति धन अर्थात् फिरौती के लिये व्यपहरण (IPC धारा 364-क)
vi) परिरोध करने के लिये व्यपहरण (IPC धारा 365)
vii) विवाह अथवा अयुक्त सम्भोग आदि के लिये व्यपहरण या अपहरण (IPC धारा 366)
viii) घोर उपहति, दासत्व आदि के लिये व्यपहरण या अपहरण (IPC धारा 367)
ix) सम्पत्ति की चोरी के आशय से शिशुओं का व्यपहरण या अपहरण (IPC धारा 369)

व्यपहरण क्या है? (What is Kidnapping?)


भारतीय दंण्ड सहिता में व्यपहरण (Kidnapping) की परिभाषा नहीं दी गयी है। धारा 359 में केवल यही कहा गया है कि व्यपहरण दो प्रकार का होता है-


i) भारत में से व्यपहरण
ii) विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण। व्यपहरण का शाब्दिक अर्थ है-बाल चोरी 

बालकों की ऐसी चोरी सामान्यत: उनसे भिक्षावृत्ति कराने, मुक्तिधन प्राप्त करने उनके शरीर से सम्पत्ति की चोरी करने आदि के लिये की जाती है।

अपहरण क्या है? (What is Abduction?)


अपहरण (Abduction) की परिभाषा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 362 में दी गयी है। इसके अनुसार-


जो कोई किसी व्यक्ति को किसी स्थान में जाने के लिये बल द्वारा विवश करता है या किन्हीं प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा उत्प्रेरित करता है वह उस व्यक्ति का अपहरण (Abduction) करता है यह कहा जाता है। इस प्रकार अपहरण (Abduction) के निम्न दो तत्व है-


i) किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिये बाध्य या उत्प्रेरित किया जाना,
ii) ऐसा बलपूर्वक या प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा किया जाना।

यदि कोई व्यक्ति किसी लड़की को उसके ससुराल से फुसलाकर ले आता है तो इसे प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा अपहरण माना जायेगा।

 

(फूला बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान, 1979 क्रि०लॉ रि० 234 राज०) गंगा देवी बनाम राज्य, ( 1914) 12 ए०एल०जे०आर० 1911 में इसे एक निरन्तर अपराध माना गया है। झाप्सा कबाड़ी बनाम स्टेट ऑफ बिहार, ए०आई०आर० 2002 एस०सी० 312 के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि जहा तीन वर्षीय बालक को उसकी माता की गोद से अपहरण किया गया हो, वहां दोषसिद्धि के लिए केवल माता की साक्ष्य पर्याप्त है।

अपहरण एवं व्यपहरण में अन्तर (Difference between Abduction and Kidnapping)


व्यपहरण एवं अपहरण के बीच अंतर को निम्नवत् स्पष्ट किया गया है-

 

i) अपहरण किसी भी आयु के व्यक्ति का किया जा सकता है जबकि व्यपहरण केवल अवयस्क या विकृतचित्त व्यक्ति का किया जा सकता है। ऐसा अवयस्क यदि पुरुष है तो 16 वर्ष से कम आयु का और यदि स्त्री है तो 18 वर्ष से कम आयु की होना चाहिये।
ii) किसी भी व्यक्ति का स्वत: अपहरण किया जा सकता है जबकि व्यपहरण किसी विधिपूर्ण संरक्षक की अभिरक्षा में ही किया जा सकता है ।
iii) अपहरण में बल या छल का प्रयोग किया जाना आवश्यक है जबकि व्यपहरण में बल या छल का प्रयोग किया जाना आवश्यक नहीं है।
iv) अपहरण में यदि अपहृत व्यक्ति द्वारा स्वतंत्र सम्मत्ति प्रदान की जाती है तो अपहरण के अपराध का गठन नहीं होता है जबकि व्यपहरण में सम्मति का कोई महत्व नहीं होता है।

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