Define Consent – सहमति की परिभाषा दीजिए अपराध विद कि किन परिस्थितियों में सहमति एक वैध प्रतिरक्षा हो सकती है

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सहमति की परिभाषा (स्वीकृति, Define Consent) दीजिए अपराध विद कि किन परिस्थितियों में सहमति एक वैध प्रतिरक्षा हो सकती है

सहमति की परिभाषा:- सहमति में तात्पर्य किसी सकारात्मक अभिव्यक्त द्वारा इच्छा प्रकट करना, अर्थात, किसी कार्य के प्रति सकारात्मक भावना की अभिव्यक्ति को ही सहमति कहते हैं। यह आत्मसमर्पण से भिन्नयानि यानि की अलग है। प्रत्येक सहमति में आत्मसमर्पण होता है। परंतु प्रत्येक आत्मसमर्पण में सहमति हो, यह आवश्यक नहीं है । सहमति (स्वीकृति) अनुमोदन तथा समर्थन से भिन्न है। स्पष्ट हो कि अपराध के बाद का अनुमोदन या समर्थन उसे वैध नहीं बना देता। उल्लेखनीय है कि भारतीय दंड सहिता में सहमति कि कहीं कोई परिभाषा नहीं दी गई। इसलिए धारा 90 में यह आवश्यक उपबंध किया गया है। जिससे सहमति क्या नहीं होगी का ज्ञान हो सके।

धारा 90 के अनुसार सहमति (स्वीकृति) की परिभाषा यदि।

1- 12 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति द्वारा दी जाती है, या
2- किसी व्यक्ति द्वारा क्षति के भय के आधीन दी जाती है, या
3-किसी व्यक्ति द्वारा तथ्य के भ्रम के कारण दी जाती है या
4- किसी विकृत चित्त्त व्यक्ति द्वारा दी जाती है, या
5- किसी नशे के अधीन व्यक्ति द्वारा दी जाती है।
उपर्युक्त संख्या (ii)  तथा (iii) के लिए यह आवश्यक है। कि सहमति प्राप्त करने वाले व्यक्ति इस बात को जानता हो, या विश्वास किए जाने का कारण हो, जब की संख्या (iv) तथा (v) के लिए यह आवश्यक है, कि सहमति देने वाला व्यक्ति उस असमर्थता की प्रकृति और परिणाम को ना जानता हो। जिस कार्य के लिए वह अपनी सहमति दे रहा है।

धारा 87 के अनुसार- सहमति (स्वीकृति) की परिभाषा

कोई बात जो मृत्यु करने या गंभीर चोट पहुंचाने के  आशय से ना की जाए। और वह किसी ऐसे व्यक्ति की सहमति से जो 18 वर्ष से अधिक आयु का हो, प्रत्यक्ष या दक्षित सहमत दिए जाने के बाद किया गया हो अपराध नहीं होता।

 दृष्टांत

क  और य  आपस में पट्टेबाजी करने को सहमत (स्वीकृति) होते हैं। इस सहमति में किसी अपहानि को जो ऐसी पट्टेबाजी में  नियम के विरुद्ध ना होते हुए कारित हो, उठाने की हर एक की संपत्ति विवक्षित है, और यदि क यथानियम पट्टेबाजी करते हुए, य को उपहार कारित  देता है, तो क कोई अपराध नहीं करता है। हानि पहुंचाने वाला व्यक्ति उत्तरदाई नहीं ठहराया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति स्वयं की सहमति (स्वीकृति) से हानि उठाता है। क्योंकि सामान्यतया यह माना जाता है, कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वयं के हित का सर्वोपरि निर्णायक है।



अतः यहां यह कहा जा सकता है, कि धारा 87 केवल उसी व्यक्ति को संरक्षण प्रदान करेगी, जिसमें 18 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति को उसकी सहमति (स्वीकृति) से हानि पहुंचाई है।  परंतु या हानि ना तो मृत्यु या गंभीर चोट होनी चाहिए। और ना ही वह कार्य मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाने के आशय से किया गया हो। और ना ही उस व्यक्ति को ज्ञान हो कि उस कार्य से मृत्यु या गंभीर चोट पहुंच सकती है। सहमति (स्वीकृति) प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष दोनों ही प्रकार की हो सकती है। किंतु एक परिपक्व बुद्धि वाला व्यक्ति ही सहमति देने में सक्षम होगा।।।

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