अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् की परिभाषा | Defination of International Commercial Arbitration

अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् (International Commercial Arbitration)
अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् (International Commercial Arbitration)
Spread the love

अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् (International Commercial Arbitration)

 

अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् :- धारा  2 (1) (f) के अनुसार अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थ विधिक नातेदारी से उद्भूत होने वाले विवादों से सम्बन्धित एक माध्यस्थम् है, चाहे भारत की लागू किसी विधि के अधीन वाणिज्यिक के समान संविदात्मक समझा जाये या न समझा जाये और वहाँ पक्षकारों में कम से कम एक हो-

1. एक व्यक्ति जो भारत से भिन्न किसी दूसरे देश का आभ्यासिक तौर पर निवासी हो या नागरिक हो,
2. एक निगमित निकाय जिसे भारत से भिन्न किसी दूसरे देश से सम्मिलित किया जाता हो, या
3. एक कम्पनी या एक संगम या उन व्यक्तियों का निकाय जिसका केन्द्रीय प्रबन्धन और नियंत्रण भारत से भिन्न किसी देश से किया जाता हो, या
4. एक विदेशी सरकार।


International Commercial Arbitration” means an arbitration relationg to disputes arising out of legal relationships whether contractual or not. considered as commercial under the law in force in India and where atleast one of the parties is-


1. an individual who is a national of, or habitually resident in, any country other than India: or
3. a company or an association or a body of individuals whose central management and control is exercised in any country other than India; or
4. the Government of a Foreign country.


इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् एक ऐसा माध्यस्थम् है जो विधिक सम्बन्धों से उत्पन्न होता है। इस विधिक सम्बन्ध का निर्माण संविदा से होता है यह आवश्यक नहीं है, परन्तु इसके लिए एक पक्षकार का विदेशी होना आवश्यक है।

Read More

 

  1. माध्यस्थम एवं सुलह अधिनियम 1996 का संक्षिप्त इतिहास | Brief History of Arbitration and Cancellation Act 1996 
  2. What is Arbitration Agreement in Hindi | माध्यस्थम् करार क्या है
  3. Defination of Arbitral Award in Hindi | माध्यस्थूम पंचाट क्या है
  4. माध्यस्थम् तथा सुलह अधिनियम 1996 के अधिनियमित होने के कारण | Reasons for enactment of the Arbitration and Conciliation Act 1996
  5. Defination of Arbitration in Hindi | माध्यस्थम् की परिभाषा
  6. बेटियों को पैतृक संपत्ति में हक पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला
  7. सुप्रीम कोर्ट का अहम् फैसला रजनेश बनाम नेहा | Maintenance Awarded Must Be Reasonable Realistic
  8. IPC 44 in Hindi | Indian Penal Code Section 44 in Hindi | Dhara 44 IPC Kya Hai
  9. परिवीक्षा से आप क्या समझते हैं | What do you understand by ‘Probation’
  10. Our Foundamental Duties Explained in Hindi | हमारे मौलिक कर्तव्य
  11. Indian Penal Code Section 299 – Culpable Homicide in Hindi
  12. सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – बहू को सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार
  13. भारत के संविधान का अनुच्छेद 47, (Article 47 of the Constitution) 
  14. Supreme Court Landmark Judgement on Daughters Right Father’s Property | बेटी की मृत्यु हुई तो उसके बच्चे हकदार
  15. How to Make a WILL in India – What is WILL
  16. What Kind of Judiciary is There in India | भारत में किस तरह की न्यायपालिका है
  17. Bhagat Sharan vs Prushottam & Ors – जॉइट प्रॉपर्टी के बटवारे को लेकर विवाद
  18. प्रधानमंत्री जन औषधि योजना|| PMJAY
  19. Benefits of Power Yoga | What is Power Yoga | पावर योग क्या है

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*