Bhagat Sharan vs Prushottam & Ors – जॉइट प्रॉपर्टी के बटवारे को लेकर विवाद

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि प्रॉपर्टी जॉइट प्रॉपर्टी है तो उसे ज्वाइंट प्रॉपर्टी साबित करने का पूरा दायित्व भी दावा करने वाले पर ही होगा ।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रॉपर्टी बंटवारे को लेकर सुनवाई हो रही थी और इस मामले पर न्यायमूर्ति नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता के बीच सुनवाई कर रहे थे

पीठ ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि कोई परिवार संयुक्त परिवार है तो उस व्यक्ति को ही उस परिवार के संयुक्त होने का प्रमाण पत्र देना होगा । और उस व्यक्ति को यह भी साबित करना होगा कि प्रॉपर्टी भी संयुक्त परिवार की ही प्रॉपर्टी है ।

उसे ही साबित करना होगा और उसके संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे कि प्रॉपर्टी को संयुक्त रूप से कमाया गया है या फिर खरीदा गया था ।

सुप्रीम कोर्ट ने इसमें तीन केसों का हवाला दिया




  1. अपाला स्वामी बनाम सूर्य नारायण मूर्ति
  2. श्रीनिवास कृष्णराव कांगो बनाम नारायण देव जी कांगो
  3. डी एस लक्ष्मणैया बनाम एल बालासुब्रमण्यम

और कहा कि डी लक्ष्मणैया केस में कहा गया है कि कानूनी सिद्धांत यह कहता है कि केवल यह माना जाए कि कोई परिवार संयुक्त परिवार है सिर्फ इस वजह से यह नहीं कहा जा सकता कि प्रॉपर्टी भी संयुक्त परिवार की ही होगी ।

लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस तरह का दावा करता है तो उसे यह साबित भी करना होगा कि परिवार संयुक्त परिवार था और प्रॉपर्टी भी संयुक्त परिवार की कमाई से ही खरीदी गई थी । अगर दावा करनेवाला व्यक्ति साबित करने में सफल हो जाता है कि विवादित प्रॉपर्टी जॉइंट फैमिली की earning से कमाई गई थी । तो उस प्रॉपर्टी को जॉइंट फैमिली की प्रॉपर्टी मान लिया जाएगा ।

तब अगर कोई फैमिली का मेंबर यह कहे कि प्रॉपर्टी जॉइंट फैमिली की नहीं थी उसकी खुद की कमाई से खरीदी गई थी ।तब यह प्रूफ करने का दायित्व उस व्यक्ति पर चला जाएगा जिसने ऐसा दावा किया है ।

इस केस में जो डॉक्यूमेंट या दस्तावेज दिखाए गए थे उसके आधार पर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ संयुक्त परिवार होने से या कारोबार संयुक्त रूप से चलाने की वजह से यह नहीं माना जाएगा कि प्रॉपर्टी भी संयुक्त परिवार की है ।




केस नं.

सिविल अपील संख्या 6875/2008

केस का नाम : भगवत शरण बनाम पुरुषोत्तम (Bhagat Sharan vs Prushottam & Ors)

कोरम : न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता

वकील : सीनियर एडवोकेट सुशील कुमार जैन एवं हरीन पी रावल

वकील : सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्ण कुमार, विकास सिंह एवं अनुपम लाल दास




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